कैसे बुझेगी 25 लाख की प्यास

परेशानी. 48 मिनी जलापूर्ति प्लांट संचालित, 16 जगह योजना अंतिम चरण में सूबे में लोग बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी मार झेलने को विवश हैं. वहीं बांका जिला भी इस बार पूरी तरह सुखाड की चपेट में हैं. जिससे यहां सिंचाई के साथ ही पेयजल समस्या गहरा गयी है. बांका : जिले के सुदूर ग्रामीण […]

परेशानी. 48 मिनी जलापूर्ति प्लांट संचालित, 16 जगह योजना अंतिम चरण में

सूबे में लोग बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी मार झेलने को विवश हैं. वहीं बांका जिला भी इस बार पूरी तरह सुखाड की चपेट में हैं. जिससे यहां सिंचाई के साथ ही पेयजल समस्या गहरा गयी है.
बांका : जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोगों को पेयजल मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही मिनी जलापूर्ति योजना की सार्थकता सिद्ध नहीं हो पा रही है. वहीं यह सुविधा एक हजार की आबादी वाले गांवों में बहाल की जानी है. जिसके मानक को महज जिले के 185 पंचायतों के मात्र 48 गांव ही पूरा कर रहे हैं, जहां मिनी जलापूर्ति योजना लगाये गये हैं. ऐसे में करीब 25 लाख की आबादी वाले इस जिले में सिर्फ 48 गांवों में मिली जलापूर्ति योजना शुरू करना पेयजल संकट को दूर करने के लिए न काफी साबित हो रहा है.
आबादी के आंकड़े में अटक गयी योजना: सरकार के मानक पर खरा नहीं उतरने से जिले का चांदन प्रखंड आज भी मिली जलापूर्ती योजना से महरूम है. यहां के एक भी गांव में एक हजार की आबादी के आंकड़े को पार नहीं करने से मिनी जलापूर्ती योजना अटक गयी है. हालांकि लोगों की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने सूइया में एक योजना की शुरूआत की है.
जिले में चलायी जा रही तीन तरह की योजनाएं: लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा जिले भर में 48 मिनी जलापूर्ति योजनाएं संचालित की जा रही है. इसके अलावे 16 जगहों पर योजना अंतिम चरण में हैं. जिनमें सौर ऊर्जा चालित मिनी जलापूर्ति योजना, फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में रिमूभल संयंत्र के साथ सौर र्जा चालित मिनी जलापूर्ति योजना एवं विद्युत चालित मिनी जलपूर्ति योजना शामिल है. राज्य सरकार द्वारा जिले में तीन प्रकार की योजनाएं संचालित हो रही हैं.
जिसमें मिनी जलापूर्ति योजना जो राज्य सरकार द्वारा संचालित होती है. ग्रामीण जलापूर्ति योजना जो राज्य एवं केंद्र सरकार दोनों के सहयोग से संचालित होती है एवं विश्व बैंक संपोषित ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता परियोजनाएं चल रही है.
यहां लगाये जा रहे मिनी जलापूर्ति प्लांट: जिले के शंभुगंज के गुलनी कुशाहा एवं सतपटटी, अमरपुर प्रखंड के डुमरामा, बांका प्रखंड के ककवारा एवं फुल्लीडुमर प्रखंड के खेसर व फुल्लीडुमर में मिनी जलापूर्ति के प्लांट लगाये जा रहे हैं.
वहीं ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता परियोजना के तहत विश्व बैंक संपोषित बाराहाट प्रखंड के बढ़ौना, बौंसी प्रखंड के कुशमाहा, कटोरिया प्रखंड के जयपुर, चांदन प्रखंड के सूईया, शंभुगंज प्रखंड के मालडीह, बेलहर प्रखंड के लौढ़िया, अमरपुर प्रखंड के पवई, रजौन प्रखंड के सिंहनान एवं धोरैया प्रखंड के बटसार व अटपहरा गांव में मिनी जलापूर्ति योजना का कार्य प्रगति पर है.
बांका: डोमाखाड़, कमलडीह व कल्याणपुर
शंभुगंज: बेला, वंशीपुर व करंजा
बाराहाट: बडी विषहर, छोटी चिहार, पथरा व लीलावरण
फुल्लीडुमर: चौडांड़ व इनारावरण
कटोरिया: राधा नगर
रजौन: मुसहरी टोला, पटसौरी, नरीपा, टेकनी, संझा, मधाय व महेशाचन्दा
बेलहर: श्रीनगर, निमीया, नवीबांध, बिजीखोरवा व सौताडीह
धोरैया: सरगुनिया, गौडा, गंगदौरी व जयपुर
बौंसी: पंडा टोला, पुरानी अस्पताल बौंसी, कोराबांध, खेडीमोड, चुआपानी, भलजोर व लीलावरण
अमरपुर: महादेवपुर, धर्मराय, चकसिया, कुशमाहा, विक्रमपुर, चौरवेय, गोरगामा, बाजा, मकदुमा पश्चिम, राजपुर, रामनगर व शाहपुर

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