बांका : सरकार के तरफ से अमीरी व गरीबी रेखा तय कर दी गयी है, लेकिन यह रेखा धरातल पर नहीं उतर पायी है. ज्ञात हो कि जिले के अमरपुर प्रखंड के रहने वाले हैं और बांका में रह कर प्लास्टिक चून कर अपनी रोजी रोटी निकाल रहे हैं. इन लोगों के पास न तो रहने के लिए घर है और न ही खेती करने के लिए जमीन.
कूड़े के ढ़ेर पर इनकी रोजी रोटी भी और विश्राम गृह है. उस कूड़े के ढ़ेर देख कर तो ऐसा लगता है जैसे उक्त स्थल पर कोई मनुष्य की बात तो दूर बल्कि जानवर भी अपना बसेरा नहीं डालेगा. उक्त स्थल पर न ही पेयजल की व्यवस्था है . साथ ही रहने के लिए कूड़े के ढ़ेर में ही अपना अशियाना बनाये हुए हैं. इनलोगों के साथ सरकार की सारी योजना कोढ़ साबित हो रही है.
प्रभात खबर के संवाददाता जब इनसे मिले तो शायद ये दर्द कैसे बयां किया. इस संबंध में शंकर मुसहर, लखन मुसहर, मंटून मुसहर, सुधीर मुसहर, बम्बईया मुसहर,
ये सभी अमपुर प्रखंड से बांका आकर प्लास्टिक, पुराना लोहा इत्यादि चुन कर अपना गुजर बसर करते हैं. इन लोगों ने बताया कि गांव में झोपड़ी की मकान तो है पर वहां रोजगार नहीं, शहर में रोजगार तो हैं पर यहां रहने को उतने पैसे कहां ऐसे में जहां तहां बसर कर लेते है. सरकार के तरफ से कोई सुविधा नहीं मिलती है.
