बांका : तीसरे कोण से तय होगा परिणाम

बांका जिले की पांचों सीटों पर घमसान मचा हुआ है. नेताओं के तूफानी दौरे से माहौल पूरी तरह चुनावी हो गया है. बांका के टूटे पुल-पुलिया, जर्जर एनएच के मुद्दे धीरे-धीरे गौण हो गये हैं. हर सीट पर जाति हावी हो रही है. यही कारण है कि नेताओं का दौरा भी उसी हिसाब से तय […]

बांका जिले की पांचों सीटों पर घमसान मचा हुआ है. नेताओं के तूफानी दौरे से माहौल पूरी तरह चुनावी हो गया है. बांका के टूटे पुल-पुलिया, जर्जर एनएच के मुद्दे धीरे-धीरे गौण हो गये हैं. हर सीट पर जाति हावी हो रही है. यही कारण है कि नेताओं का दौरा भी उसी हिसाब से तय हो रहा है.
कई नेता ऐसे इलाके में जा रहे हैं, जहां उनकी जाति की बहुलता है. कहने को तो विकास ही मुद्दा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है. जिले की पांच विधानसभा सीटों में से अमरपुर, धोरैया और बेलहर पर जदयू, तो कटोरिया व बांका पर राजद ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी. हालांकि बांका सीट से जीते जावेद इकबाल राजद छोड़ जदयू में शामिल हो गये थे. इसके बाद हुए उपचुनाव में बांका सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया था.
जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे यहां की पांचों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है. बांका विधानसभा सीट से महागंठबंधन की ओर से जफरु ल होदा, तो एनडीए की ओर से पूर्व मंत्री रामनारायण मंडल मैदान में हैं. इस सीट से बसपा के अजीत कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह व निर्दलीय दिगंबर मंडल समीकरण को अगल दिशा देने में लगे हैं.
कटोरिया से भाजपा की निक्की हेंब्रम व महागंठबंधन की स्वीटी सीमा हेंब्रम की लड़ाई को झामुमो प्रत्याशी अंजला सोरेन त्रिकोणीय बनाने में जुटी हैं. अमरपुर से महागंठबंधन के जनार्दन मांझी व भाजपा के मृणाल शेखर के बीच की लड़ाई को निर्दलीय सुरेंद्र सिंह ने दिलचस्प बना दिया है.
बेलहर से भाजपा के मनोज यादव व जदयू के गिरधारी यादव के बीच मुकाबले को निर्दलीय राजिकशोर यादव उर्फ पप्पू यादव त्रिकोणीय बना रहे हैं. धोरैया सीट पर जदयू के मनीष कुमार के सामने रालोसपा के भूदेव चौधरी मैदान में हैं. सीपीआइ के मुनिलाल पासवान भी मैदान में हैं.
विधानसभा चुनाव में इस जिले की महत्ता इसी से समझी जा सकती है कि प्रधानमंत्री ने बांका से ही अपने चुनाव प्रचार की शुरु आत की. महागंठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की कई चुनावी सभाएं हो चुकी हैं. बांका के दो विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह नक्सल प्रभावित हैं. इन इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कराना प्रशासन के लिए चुनौती है. कटोरिया तथा बेलहर में इस बार चार बजे तक वोटिंग होगी.

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