शहर के दुर्गा मंदिरों में पेयजल की समस्या, जुगाड़ तकनीक से चल रहा है काम

शहर के दुर्गा मंदिरों में पेयजल की समस्या, जुगाड़ तकनीक से चल रहा है काम फोटो 7 बांका 20 पीएचइडी के बोरिंग में लगा सोलर स्टैंड व जुगाड़ तकनीक पर आधारित चापनल. प्रतिनिधि, बांका बीते मंगलवार को बोध नवमी के कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का अनुष्ठान शुरू हो गया है, लेकिन जिला […]

शहर के दुर्गा मंदिरों में पेयजल की समस्या, जुगाड़ तकनीक से चल रहा है काम फोटो 7 बांका 20 पीएचइडी के बोरिंग में लगा सोलर स्टैंड व जुगाड़ तकनीक पर आधारित चापनल. प्रतिनिधि, बांका बीते मंगलवार को बोध नवमी के कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का अनुष्ठान शुरू हो गया है, लेकिन जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये से शायद इस बार श्रद्धालुओं पूजा के दौरान कठिनाइयों का का सामना करना पड़ सकता है. बांका शहर में मां दुर्गा की चार मंदिर है. इसमें करहरिया, पुरानी ठाकुरवाड़ी, विजय नगर व जगतपुर दुर्गा मंदिर है. जहां पर जिला प्रशासन द्वारा पेयजल की व्यवस्था नहीं की गयी है. करहरिया के दुर्गा मंदिर परिसर में चापानल के नाम पर पीएचइडी विभाग द्वारा दो बोरिंग कराये गये थे, लेकिन इन दोनों में एक बोरिंग में चापानल का हेड लगा ही नहीं. उसमें नगर पंचायत द्वारा सोलर लाइट लगा दिये गये हैं. जो लगने के कुछ माह बाद ही लाइट बंद हुआ और आज तक बंद है. जबकि दूसरे बोरिंग में जो चापानल लगाये गये थे. उसका हेड कब का खराब हो गया. जिसकी लिखित सूचना करहरिया पूजा समिति द्वारा विभाग को दे दिया गया है. लेकिन कई माह बीतने के बाद भी विभाग द्वारा इसकी मरम्मती नहीं की गयी. बल्कि विभाग के कर्मी चापानल के हेड बदल कर दूसरा लाने बात कह कर गये जो आज तक नहीं लगा पाये. जब काफी दिन तक विभाग के कर्मी नहीं आये तो मंदिर समिति एवं स्थानीय लोगों ने मिल कर जुगाड़ तकनीक से पीएचइडी बोरिंग के ऊपर घरों में लगने वाले चापानल के हेड को लगा कर काम लिया जा रहा है. वही यह दुर्गा मंदिर काफी प्रचलित है. जहां हजारों के संख्या में बलि पड़ता है. और हजारों हजार की संख्या में जिले के लोग पहुंचते हैं, लेकिन पेयजल के लिए मात्र एक चापानल है ऐसे में पेयजल के लिए लोग काफी परेशान होंगे लेकिन जिला प्रशासन इस ओर उदासीन बना हुआ है. साथ ही पुरानी ठाकुरवाड़ी स्थित दुर्गा मंदिर में भी विभाग द्वारा एक भी चापानल नहीं लगाया गया है. यहां पूजा करने वाले श्रद्धालु ठाकुरवाड़ी परिसर स्थित चापानल से ही काम चलायेंगे. ज्ञात हो कि शहर के बीचोंबीच स्थित होने के कारण यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है, लेकिन पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है.

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