खेत में पड़ रही है दरार, सूख रही धान की फसल
बांध टूटने से नदी में बरबाद हो रहा है पानी
विभागीय उदासीनता को देख खेत तक पानी पहुंचाने के लिए किसान बांध रहे है बांध
बांका : मौसम के बेरुखी व कड़ी धूप ने जहां लोगों को परेशान कर दिया है. वहीं मौसम की मार से किसान के चेहरे पर मायूसी छा गया है. मालूम हो कि कई माह से किसानों ने रात दिन अपने खेतों में कड़ी मेहनत का धान की फसल लगायी.
अब धान की बाली निकले का समय आया तो खेत सूख रहे हैं. इससे खेतों में दरार पड़ रही है. इसे देख कर किसानों के चेहरे पर मायूसी छाने लगी है. किसानों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा र है. इस कारण खेत में लगी धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है.
विभाग द्वारा नहर में पानी तो खोल दिया जाता है लेकिन नहर की देख भाल करने के लिए कोई विभागीय कर्मी नहीं पहुंचते है. इस कारण पिछले कई दिनों से खिड्डी मैन ब्रांच नहर जिला मुख्यालय से सटे बिशनपुर गांव के समीप दो जगहों पर टूटा हुआ है. पानी नदी में जाकर बरबाद हो रहा है, लेकिन आज तक विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
इस रवैया को देख कर सोमवार से ही कठौन, नरीपा, खैरा, खिड्डी सहित आस-पास के दर्जनों गांव के किसान रात दिन कड़ी मेहनत व बोरा में बालू भर कर नहर का बांध बांधने में जुटे हुए हैं.
बोले किसान: किसान बलराम कुमार, मोहित, परमानंद, नकुल, राजीव, कमल आदि ने बताया कि अभी धान खेत में पानी रहना जरूरी है, ताकि धान की बाली सही ढंग से निकल सके, लेकिन धान के खेत में दरार पड़ गयी है. फसल सूखने के कगार पर पहुंच गयी है.किसानों ने बताया कि विभागीय उदासीनता को देख कर हम लोग खुद बांध की मरम्मती में जुटे हुए हैं, ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके और धान की अच्छी पैदावार हो.
