बौंसी : केंद्र सरकार के द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की योजना भले ही अब शुरू की गयी हो, लेकिन अंबातरी गांव के नइम ने इसको पहले से ही साबित कर दिया था. पांच पुत्री और तीन पुत्र के पिता फूस और खपरैल के मकान में रहकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया.
पुणे के किसी कंपनी में बतौर सिविल फोरमैन की नौकरी करने वाले नइम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए दिन रात मेहनत कर अपनी सबसे बड़ी पुत्री यासमीन अख्तर को मेडिकल की पढ़ाई के लिए दिल्ली तक भेजा. फिलहाल यह भागलपुर में रहकर कंपीटीशन की तैयारी कर रही है. जबकि दूसरी पुत्री दिलशाद अख्तर एमएससी के बाद नीट की तैयारी कर रही है. मृतक नाजली बीएससी पार्ट थर्ड की छात्रा थी. पुत्री नाजली अख्तर और लुबना अख्तर अद्वैत मिशन शिव धाम की छठी क्लास की छात्रा हैं.
26 वर्षीय पुत्र अरमान अख्तर और वसीम अख्तर बीटेक कर रहे हैं. जबकि सलमान थाना क्षेत्र के प्राइवेट स्कूल में दसवीं की पढ़ाई कर रहा है. परिजनों को उम्मीद थी कि उसकी तीनों पुत्रियां अच्छी नौकरियां कर घर के साथ-साथ उसके गांव का भी नाम रोशन करेगी. लेकिन नुजहत नसरीन की मौत के बाद परिजन काफी सदमे में है. अपने पुत्रों को पुत्र समझने वाले नईम अख्तर और उनकी पत्नी बीबी लाडली का रो-रो कर बुरा हाल है. समाचार लिखे जाने तक मृतक छात्रा के पिता घर नहीं पहुंच पाये थे.
