आक्रोश. अंचल से कमिश्नर तक संपर्क पथ के लिए लगायी गुहार
कटोरिया : प्रखंड के कठौन पंचायत अंतर्गत गढ़ना गांव के महादलितों को लंबे संघर्ष के बाद भी आज तक संपर्क पथ का लाभ नहीं मिल सका. पगडंडी के सफर से मुक्ति के लिये महादलितों ने पिछले पांच सालों के दौरान अंचल कार्यालय से लेकर कमिश्नर कार्यालय तक की दौड़ लगायी. लेकिन समस्या का निदान आज तक नहीं हो पाया. लाचार महादलितों ने अब ‘रोड नहीं, तो वोट नहीं’ के नारे को बुलंद करने को मजबूर हुए हैं. कठौन पंचायत के वार्ड नंबर 10 व 11 के बीच में स्थित महादलित टोला की आबादी लगभग एक हजार है. इस गांव में चार पहिया गाड़ी तो दूर ठेला तक घुसने का रास्ता नहीं है.
गांव से बीमार या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिये खाट का ही सहारा लेना पड़ता है. बरसात के दिनों में तो इस महादलित बाहुल गांव का नजारा एक टापू की तरह हो जाता है. संपर्क पथ से वंचित ग्रामीण गढ़ना गांव निवासी राधे मिस्त्री के घर से लेकर दुखहरण दास के घर तक रास्ता निर्माण की मांग वर्ष 2012 ई से ही कर रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि अंचल के बाद डीडीसी, डीएम व कमिश्नर तक के कार्यालय में भी सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन दिया. लेकिन कहीं से भी अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है.
कई बार अधिकारियों की टीम ने समस्या की जांच भी की. लेकिन कोई भी निदान निकलवा पाने में सफल साबित नहीं हुए. गढ़ना महादलित गांव के ग्रामीण दुखहरण दास, गोपी दास, बट्टू दास, रूसन दास, गोविंद दास, भूमेश्वर दास, कामेश्वर दास, बजरंगी दास, रमेश दास, शिबू दास, पप्पू दास, प्रमोद दास, दिनेश दास, जल्धर दास, रामसुंदर दास, देवेंद्र दास, रूकिया देवी, ने पुन: डीएम से संपर्क पथ दिलाने की गुहार लगायी है.
