मंटू खैरा के करीबी नक्सली मनोज खैरा ने किया आत्मसमर्पण
कटोरिया : दो सप्ताह बाद पुन: एक हार्डकोर नक्सली मनोज खैरा ग्राम पिलुआ (आनंदपुर ओपी) द्वारा सरेंडर करना जिला प्रशासन की सफलता का परिचायक है. इसमें एसएसबी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. साथ ही यह भी माना जा रहा है कि गत 21 फरवरी 2017 को पुलिस एनकाउंटर में मोस्ट वांटेड एरिया कमांडर मंटू खैरा के मारे जाने के बाद से इस क्षेत्र में नक्सली संगठन ज्यादा ही कमजोर भी हुआ है. गत छह नवंबर को आनंदपुर ओपी के डोमनाडीह गांव निवासी बहादुर राय के पुत्र सह हार्डकोर नक्सली प्रेम राय ने भी एसपी के समक्ष सरेंडर किया था. गुरुवार 23 नवंबर को सरेंडर करने वाले नक्सली मनोज खैरा की उम्र मात्र 23 साल है. उसकी शादी फुल्लीडुमर में हुई है. उसे दो वर्ष का एक लड़का भी है.
तीन साल पहले पिलुआ गांव में हुई थी मंटू खैरा से मनोज की पहचान
मनोज खैरा कलम से अपना सिर्फ नाम लिख पाता है. पांच भाइयों में मनोज दूसरे नंबर पर है. सबसे छोटा भाई की उम्र नौ साल है. प्राप्त जानकारी के अनुसार मंटू खैरा से मनोज की पहचान करीब तीन साल पहले पिलुआ गांव में ही हुई थी. इसके बाद से ही उसकी संगठन में सक्रियता तो बढ़ी, लेकिन उसे हथियार नहीं मिला था. उसकी जिम्मेदारी मंटू खैरा व उसके सशस्त्र दस्ते को सुरक्षित आवागमन के लिये सहायता प्रदान करना, लेवी आदि गतिविधि में मदद करना, संगठन के हथियार, गोला-बारूद आदि सामान को सुरक्षित रखना तथा संगठन के संबंधित निर्देशों को ठेकेदारों तक पहुंचाना आदि था.
नक्सली संगठन में एक साल काम करने के बाद ही मनोज को लगने लगा कि उसके लिये यह जगह ठीक नहीं है. फिर वह रोटी की तलाश में दिल्ली चला गया. मंटू खैरा के मारे जाने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा के साथ वह घर लौटा था. मनोज के सरेंडर में एएसपी अभियान विमलेश चंद्र झा, एसएसबी के उपकमांडेंट पीके मेहंदी, इंस्पेक्टर जीडी मुकेश कुमार, आनंदपुर ओपीध्यक्ष रविशंकर कुमार, सब इंस्पेक्टर मुरलीधर साह, सूइया थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार, एसएसबी के आकाश महापात्रा, सियाराम शमा्र, डीनाथलेन, रौशन कुमार गुप्ता, श्रवण कुमार आदि ने अहम भूमिका निभायी.
