Aurangabad News : औरंगाबाद ग्रामीण शहर के बिराटपुर अखाड़ा स्थित एक निजी विद्यालय में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया. विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा.
शिक्षकों की भूमिका पर दिया गया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव और व्यस्तता के कारण लोगों की चिंतनशील प्रवृत्ति लगातार कम होती जा रही है. ऐसे में आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत और सकारात्मक बनाता है. उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. शिक्षक यदि स्वयं एकाग्र, धैर्यवान और सकारात्मक रहेंगे तो वे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दे सकेंगे.
सुंदरकांड पाठ से मिलती है मानसिक शांति
वक्ताओं ने कहा कि विद्यालय में सुंदरकांड पाठ का उद्देश्य शिक्षकों और समाज के लोगों में चिंतनशीलता, एकाग्रता, धैर्य और सकारात्मक व्यवहार विकसित करना है. रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ और श्रवण मन को शांति देता है तथा व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. इससे मानसिक तनाव कम होता है और व्यवहार में संतुलन आता है.
युवाओं को आध्यात्मिक उन्नति की जरूरत : बीडीओ
छुट्टी पर अपने घर आए प्रखंड विकास पदाधिकारी भृगुनाथ सिंह ने कहा कि जब भी उन्हें अवकाश मिलता है, वे ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं. उन्होंने युवाओं से सुंदरकांड का नियमित पाठ करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मन को स्थिरता मिलती है और जीवन में सकारात्मक सोच विकसित होती है. कार्यक्रम में आलोक सिंह, अनिल सिंह, अशोक सिंह, जदयू नेता अमिताभ सिंह, दीपक सिंह, हरेंद्र सिंह, सुनील सिन्हा, पंकज कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.
