NH-19 पर 60 घंटे से जाम में फंसे हजारों वाहन, औरंगाबाद में मचा हाहाकार

Bihar: औरंगाबाद में NH-19 पर स्थित गेमन पुल के सस्पेंशन जॉइंट की मरम्मत के कारण पिछले 60 घंटों से महाजाम लगा है. न्यू गेमन पुल बंद होने से पुराने पुल पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है, जिससे डेहरी से बारुण तक कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी हैं और जनजीवन पूरी तरह ठप है.

Bihar, राजू रंजन: औरंगाबाद में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) 19 पर पिछले तीन दिनों से परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. डेहरी और बारुण के बीच सोन नदी पर स्थित गेमन पुल के सस्पेंशन जॉइंट को क्षतिग्रस्त होने और उसकी मरम्मती के कारण हजारों वाहन पिछले 60 घंटों से महाजाम की चपेट में हैं. एक छोर पर डेहरी और दूसरे छोर पर बारुण तक वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गई हैं. इसके कारण बारुण -नवीनगर रोड में भी जाम लग गयी है.

मरम्मती कार्य बना मुसीबत, रेंग रहे वाहन

न्यू गेमन पुल का सस्पेंशन जॉइंट (पुल और सड़क का जोड़) काफी समय से जर्जर स्थिति में था. शुक्रवार से इस पर युद्धस्तर पर मरम्मती का कार्य शुरू किया गया, जिसके बाद न्यू गेमन पुल को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया. अब सारा ट्रैफिक लोड पुराने गेमन पुल पर आ गया है. एक ही पुल पर अचानक वाहनों का दबाव बढ़ने से स्थिति अनियंत्रित हो गई है. ट्रक, बस और अन्य भारी वाहन कछुए की चाल से भी धीमी गति से सरक रहे हैं.

घंटों फंसे वाहन, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

भारी संख्या में ट्रक, कंटेनर , मालवाहक वाहन, निजी वाहन और बस सड़क के दोनों ओर कतारबद्ध खड़े हैं. धूल, धूप और शोर के बीच फंसे वाहन चालकों तथा यात्रियों की परेशानी साफ झलक रही है. वही जाम के कारण यात्रियों को घंटों तक सड़क पर फंसे रहना पड़ रहा है.

आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई कर रहे ट्रक, बस, निजी वाहन और एम्बुलेंस तक जाम में फंसने की सूचना है. स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यापार, दफ्तर, स्कूल और आपात सेवाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है. महाजाम से करोड़ों रुपये का नुकसान भी वाहन मालिकों और विभिन्न कंपनियों को हुआ है.

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बार-बार टूटता जॉइंट, व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि इसी स्थान पर पहले भी कई बार सस्पेंशन जॉइंट टूट चुका है. हर बार मरम्मती के नाम पर खानापूर्ति की जाती है, जिसके कारण कुछ ही समय बाद वही जोड़ फिर से उखड़ जाता है.

बार-बार की इस समस्या से न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक परिवहन को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. बार-बार उसी स्थान पर खराबी आने से मरम्मत की गुणवत्ता और स्थायी समाधान पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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