Aurangabad DM Janta Darbar (सुजीत कुमार सिंह): बिहार के औरंगाबाद जिले में आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निष्पादन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अख्तियार कर चुका है. बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत लोगों की फरियाद पर त्वरित और प्रभावी एक्शन सुनिश्चित करने के लिए जिला पदाधिकारी (DM) अभिलाषा शर्मा ने गुरुवार को समाहरणालय में द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के अंतर्गत कई गंभीर मामलों की ऑन-द-स्पॉट सुनवाई की. सुनवाई के दौरान डीएम ने एक-एक परिवादी की शिकायतों को बेहद गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों से प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए लापरवाह अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की.
जमाबंदी में छेड़छाड़ और बिना अधिग्रहण के पुल निर्माण जैसे 7 बड़े मामलों पर हुआ एक्शन
डीएम अभिलाषा शर्मा की इस जनसुनवाई में जिले के कई ऐसे बड़े और पेंडिंग मामले सामने आए, जिन पर अधिकारियों की ढिलाई साफ उजागर हो रही थी. डीएम ने इन सभी फाइलों को खोलकर सीधे कार्रवाई का आदेश दिया:
- 7 साल से अधूरा भवन: परिवादी विकेश कुमार सिंह द्वारा पिछले सात वर्षों से कछुआ गति से चल रहे और अधूरे पड़े पंचायत सरकार भवन के निर्माण कार्य को अविलंब पूरा कराने की मांग पर डीएम ने संबंधित विभाग से जवाब तलब किया.
- जमाबंदी में हेरफेर: मुखदेव सिंह द्वारा सरकारी जमाबंदी पंजी (जमीन के रिकॉर्ड) में कथित रूप से अवैध छेड़छाड़ करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने दोषी राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी (CO) के विरुद्ध सख्त जांच और कार्रवाई का निर्देश दिया.
- जमीन हड़पने का आरोप: अभिमन्यु कुमार सिंह द्वारा दर्ज कराई गई इस सनसनीखेज शिकायत पर कि बिना भूमि अधिग्रहण किए ही उनकी निजी रैयती भूमि पर अवैध रूप से पुल का निर्माण करा दिया गया है, डीएम ने तुरंत जांच टीम गठित करने को कहा.
- सड़क किनारे अवैध कब्जा: पुष्पेंद्र कुमार सिंह द्वारा मुख्य सड़क के किनारे अवैध रूप से झोपड़ी बनाकर आम जनता के आवागमन को बाधित किए जाने के मामले में तत्काल अतिक्रमण हटाने का निर्देश जारी किया गया.
- नाला निर्माण व जमीन विवाद: इसके अलावा मुरारी मौआर द्वारा नाला निर्माण कार्य से उत्पन्न विवाद, जयराम पांडे एवं जगन्नाथ पांडे द्वारा केवला (जमीन डीड) की गहन जांच कर उनकी रैयती भूमि पर कब्जा दिलाने तथा कमलेश सिंह द्वारा अंचल स्तर पर लंबित शिकायतों की भी विस्तृत सुनवाई की गई.
तय समय सीमा में देना होगा जवाब, निष्पक्षता से समझौता नहीं: डीएम अभिलाषा शर्मा
मामलों की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने दोटूक शब्दों में कहा कि इस अधिनियम का एकमात्र मुख्य उद्देश्य नागरिकों की गंभीर समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है. उन्होंने सभी संबंधित जिला स्तरीय पदाधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे सभी लंबित मामलों की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच करें.
डीएम ने साफ किया कि जांच के बाद निर्धारित सरकारी प्रावधानों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की जाए और इसकी पूरी लिखित सूचना तय समय सीमा के भीतर ही शिकायतकर्ताओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि शिकायतों के निपटारे में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता और समय सीमा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ताकि आम नागरिकों का कानून और जिला प्रशासन पर भरोसा मजबूत बना रहे.
