औरंगाबाद शहर : एक तरफ विज्ञान के इस युग में लगातार नये-नये प्रयोग व खोज किये जा रहे है. दुनिया भर के वैज्ञानिक ऊंचाइयो को छूने में लगे हुए हैं, तो दूसरे तरफ हमारे ही समाज का एक तबका आज भी अंधविश्वास की जद में फंसा हुआ है. एक ओझा की बात सुनने को लेकर लोगों की कतार लग गयी. हुआ कुछ भी नहीं. जब सच्चाई से सामना हुआ तो पछताने के अलावे कुछ भी हाथ नहीं लगा. मदनपुर प्रखंड के बनिया पंचायत के नगमतिया गांव की एक घटना ने अंधविश्वास को बढ़ावा दिया है. गोरा भुइंया की तीन वर्षीय बेटी सुनयना कुमारी की मौत 22 दिन पूर्व पानी से भरे गड्ढे में डूबकर हो गयी.
किसी ने बच्ची को जिंदा करने के लिए एक ओझा का नाम सुझाया. 18 मई की रात एक तांत्रिक गोरा भुइंया के घर पहुंचा और गांव के लोगों के साथ शमशानघाट पहुंचकर कुछ मंत्र पढ़े और बच्ची के शव को कब्र से निकलवाया. शव अभी पूरी तरह सड़ा भी नहीं था. तांत्रिक ने उस वक्त उपस्थित लोगों से दावा किया कि शनिवार को 12 बजे दिन में वह आयेगा और मृत बच्ची के शव को पुन: कब्र से निकाल कर सबके सामने जिंदा करेगा. इसके लिए ओझा ने बच्ची के पिता से कुछ शुल्क भी लिये और चला गया.
27 मई यानी शनिवार को तांत्रिक के दावे पर हजारों लोग बनिया शमशानघाट पर जमा हो कर ओझा के आने का इंतजार करने लगे. समय बीतता गया, लेकिन ओझा नहीं आया. मिनट दर मिनट आने की अफवाहे भी उड़ीं,आखिरकार तंत्र मंत्र और साधना को नजदीक से देखने वाले अंधविश्वासियों को निराशा हाथ लगी. भीड़ की सूचना पाकर मदनपुर थाने की पुलिस पहुंची और फिर लोगों को वापस लौटाया. इधर यह मामला पूरे दिन चर्चा में रहा. हालांकि चर्चा तो कुछ दिन पहले से ही थी. थानाध्यक्ष सुभाष राय ने बताया कि अंधविश्वास की जड़ आम लोगों की जागरूकता से ही समाप्त हो सकती है. मामले की जांच की जा रही है.
