कुटुंबा: खाताधारक अपने एकाउंट से पैसा निकालने के लिए बैंक का चक्कर लगा रहें है, पर उन्हें समय पर पैसा नहीं मिल रहा है. इससे लोगो के जरूरत को कार्य करने में परेशनी हो रही है. सबसे अधिक फजीहत तो उन किसानो को झेलनी पड़ रही है जो अपना धान पैक्स के हाथ बेचे थे. किसान धान बेचकर उस पैसे से कई कार्य करने के लिए सपना संजोये थे.
कई के घर में शादी है तो कई को बच्चो की पढ़ाई से लेकर दैनिक खर्च की वस्तुएं खरीदनी है. धान ब्रिक्री के अलावे उनके पास आय का कोई श्रोत भी नही है, जिससे वे कोई कार्य कर सके. सुही के किसान सुदर्शन सिंह, रामनरेश सिंह, संडा के अरविंद पांडेय, पूर्व मुखिया रामता सिंह आदि बताते है कि पैक्स द्वारा कोऑपरेटीव बैंक के खाते में पैसा समय पर डाला गया पर बैंक के अधिकारी पैसा नहीं होने का रोना रो रहें है. महीनो से बैंक का चक्कर लगा रहे है ,पर उनका काम नहीं हो पा रहा है.
बैंकर्स द्वारा गुरुवार को किसी को दो तो किसी को चार हजार भुगतान किया गया. किसानों को कहना है कि धान की खेती के लिए खाद व बीज भी उधार खरीदा गया था. दुकानदार भी तगादा कर रहें है. ऐसा नहीं की केवल को-ऑपरेटिव बैंक में ही पैसा नहीं है. पीएनबी अंबा व कुटुंबा में भी ग्राहको की लंबी कतार दिख रही है पर उन्हें जरूरत के अनुसार पैसा नहीं मिल रहा है. वहां के भी प्रबंधक पैसा नहीं होने का बात बताते है.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में पूछे जाने पर एमडी धर्मनाथ प्रसाद बताते हैं कि कोऑपरेटीव बैंक का पैसा पीएनबी व एमजीबी अंबा में है. वहीं से जरूरत के अनुसार पैसा नहीं मिल रहा है. गुरुवार को मात्र एक लाख रूपये मिला. उसी पैसा में से दो-चार हजार रूपये सभी ग्राहको को भुगतान किया गया है. उन्होंने बताया कि को-ऑपरेटिव बैंक में पांच लाख रुपये का ही बीमा है. इससे ज्यादा पैसा बैंक में नहीं रखा जा सकता है. पीएनबी प्रबंधक पीजे करकटा व जियाउदिन से पूछने पर बताया कि हेड ब्रांच से जरूरत के अनुसार पैसा नहीं प्राप्त हो रहा है जो ग्राहक पैसा जमा कर रहें है उसी से दूसरे को भुगतान किया जा रहा है.
