18 वर्षों से बगैर शिक्षक के संस्कृत पढ़ रहे स्टूडेंट्स

दाउदनगर अनुमंडल: अनुमंडल मुख्यालय के राष्ट्रीय इंटर स्कूल में लगभग 18 वर्षों से संस्कृत के शिक्षक नहीं हैं. मैट्रिक की परीक्षा में यह अनिवार्य विषय है. यानी संस्कृत में फेल करने का मतलब है कि परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर जायेगा. निजी स्तर पर संस्कृत विषय के ट्यूशन की व्यवस्था भी नहीं है. […]

दाउदनगर अनुमंडल: अनुमंडल मुख्यालय के राष्ट्रीय इंटर स्कूल में लगभग 18 वर्षों से संस्कृत के शिक्षक नहीं हैं. मैट्रिक की परीक्षा में यह अनिवार्य विषय है. यानी संस्कृत में फेल करने का मतलब है कि परीक्षार्थी मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर जायेगा. निजी स्तर पर संस्कृत विषय के ट्यूशन की व्यवस्था भी नहीं है.
स्वाभाविक है कि मैट्रिक स्तर तक के विद्यार्थी संस्कृत विषय की पढ़ाई के लिए निजी कोचिंग संस्थानों पर ही आश्रित हैं. जब विद्यालय में संस्कृत के शिक्षक ही नहीं हैं, तो आखिर पढ़ाई कैसे होगी. जानकारी के अनुसार एक जून 2001 को तत्कालीन संस्कृत शिक्षक युगल किशोर मिश्र के सेवानिवृत होने के बाद से आज तक इस विद्यालय में संस्कृत विषय के कोई शिक्षक पदस्थापित नहीं हुए, जबकि यदि विद्यार्थियों की संख्या देखी जाये, तो प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में लगभग 800 से 1000 तक रहती है. वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नौवीं की वार्षिक परीक्षा में 551 विद्यार्थी शामिल हुए हैं, जिनका नामांकन दसवीं कक्षा में होना तय है.
शिक्षकों के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए नौवीं कक्षा में नामांकन एक सप्ताह बाद शुरू होगा, जिसमें करीब 600 विद्यार्थियों के नामांकन की संभावना है.
अब सवाल यह उठता है कि जब संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक ही नहीं रहेंगे, तो विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास कैसे होगा.
विभाग को है जानकारी
संस्कृत शिक्षक के अभाव के बारे में विभागीय स्तर पर कई बार अवगत कराया जा चुका हैं.
कृष्ण कुमार सिंह, प्रभारी प्रधानाध्यापक

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