बाइक के लिए टूटी थी शादी को लेकर दोनों परिवारों के बीच चल रही बातचीत
मंदिर में राजू व रेशम ने रचा ली शादी, घरवालों ने भी स्वीकारा
औरंगाबाद शहर : दहेज के लिए अगर सात जन्मों का बंधन टूट जाये और नया रिश्ता जुड़ने से पहले विवादों में घिर जाये, तो ऐसे दहेज की क्या जरूरत. मामूली दहेज से किसी का घर चलनेवाला नहीं है. यह तो सिर्फ रस्म है, जो रुपया-दो रुपया से भी निभाया जा सकता है.
यह कहना है उस युवा का जिसने दहेजरूपी दानव का विरोध किया और अपने परिवार व समाज को ठोकर मार कर अपनी होने वाली दुल्हनिया को लेकर औरंगाबाद न्यायालय स्थित हनुमान मंदिर पहुंच गया. परिवार के लोग भी करते तो क्या? आखिर बेटे की जिद के आगे उन्हें हार माननी पड़ी और मंदिर में दोनों की शादी करा डाली. इस शादी का साक्षी बने हनुमानजी और बाराती शहरवासी. मामला यह है कि जपला थाना क्षेत्र के बेनी कला गांव के अशोक ठाकुर की बेटी रेशम कुमारी की शादी पांच माह पूर्व मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लपुरा गांव के लालमोहन ठाकुर के पुत्र राजु ठाकुर से तय हुई थी. कुछ नकद और एक बाइक दूल्हे को देना था, सब कुछ ठीक चल रहा था. इसी बीच 27 मार्च यानी सोमवार को शादी का दिन तय कराने रेशमी के पिता लड़के के घर गये, तो घरवालों ने बाइक के वादे की याद दिलायी. इसी बीच कुछ विवाद हो गया और शादी एक ही झटके में टूट गयी.
बेटी के पिता भारी मन से घर पहुंचे और परिवार को पूरी जानकारी दी, जिसके बाद घर में कोलाहल मच गया. इसी बीच रेशमी ने पूरी हिम्मत जुटा कर लड़के से मोबाइल पर बात की. राजू ने अपनी दुल्हनिया की बात सुन कर दुख जताया और कहा कि वह बिना दहेज के शादी करने को तैयार है.
योजना के अनुसार दोनों दूल्हा-दुल्हन मंगलवार की सुबह औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सैकड़ों लोगों के बीच मंदिर में भगवान को साक्षी मान कर शादी कर ली. इस दौरान दूल्हा व दुल्हन के परिवार भी पहुंच गये और अपनी हार मानते हुए दोनों को सुखमय भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद दिया. शादी को देखते हुए सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी थी और सभी नये जोड़े की सलामती की कामना की.
अभिशाप है दहेज : शादी संपन्न होने के बाद दूल्हा बना राजू ठाकुर अपने मां-बाप के पास आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचा और कहा कि पापा दहेज अभिशाप है. इससे किसी का घर चलनेवाला नहीं है. रेशम से शादी मैने की है. अपने परिवार को कैसे चलाना है, वह हम समझ लेंगे. इधर, पता चला कि राजू हिमाचल प्रदेश की एक प्राइवेट कंपनी में ऑपरेटर के पद पर पिछले दो सालों से कार्यरत है और अपनी कमाई से बहुत हद तक अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है.
