बदहाली. बड़ी संख्या के सामने कम पड़ रहे सदर अस्पताल के इंतजाम
हर रोज इलाज कराने पहुंचते हैं 700 से 800 मरीज
चिकित्सकों की कमी से झेलनी पड़ती है फजीहत
अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक सबसे लगायी जा चुकी है गुहार
औरंगाबाद शहर : सदर अस्पताल औरंगाबाद की व्यवस्था सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है. सच कहा जाये, तो यहां इलाज के नाम पर सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. प्रतिदिन 700 से 800 मरीज इलाज के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचते हैं, लेकिन उनका इलाज सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे होता है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आठ बजे सुबह से दो बजे तक चलनेवाली ओपीडी में एक डॉक्टर कितने मरीजों का इलाज कर सकता है. जिस हिसाब से अस्पताल में भीड़ लग रही है, उस हिसाब से एक डॉक्टर छह घंटे में लगभग 400 से 500 मरीजों का इलाज करते हैं. यानी सिर्फ मुंह से मरीजों का मर्ज सुन कर दवा लिख दी जाती है. शुक्रवार को ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी थी. ड्यूटी पर कार्यरत होमगार्ड के जवान एक-एक कर मरीजों को ओपीडी में जाने दे रहे थे.
इंतजार करते-करते टूटा सब्र का बांध : समय अधिक होते देख कतार में खड़े मरीजों के सब्र का बांध टूट गया और सुरक्षा में तैनात जवानों को ढकेल कर एक साथ ओपीडी में प्रवेश कर गये. एक साथ ओपीडी में पहुंची भीड़ को देख डॉक्टर इलाज छोड़ समझाने में लग गये.
समझाना भी उस वक्त लाजिमी था और देखते-देखते हंगामा का दौर खड़ा हो गया. हर कोई पहले दिखाने को लेकर डॉक्टर पर ही आरोप लगाना शुरू कर दिया. मरीजो के हंगामे पर अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ राजकुमार प्रसाद और मैनेजर हेमंत राजन पहुंचे और किसी तरह मरीजों को समझा-बुझा कर शांत कराया. इस बीच एक डॉक्टर के मुंह से बात निकल आयी कि अब का करें, व्यवस्था ही ऐसी है.
पुलिस की लेनी पड़ी मदद : एक तरफ मरीजों की भीड़ को लेकर डॉक्टर परेशान थे, तो दूसरी तरफ मेडिकल सर्टिफिकेट बनानेवालों की भी लंबी कतारें लगी थी. अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ राजकुमार प्रसाद के कक्ष तक मेडिकल बनानेवाले लोग पहुंच गये. इस बीच काफी देर तक बहस और हंगामे का दौर चला. सीआरपीएफ के एक जवान और कुछ अन्य लोग अस्पताल उपाधीक्षक से भिड़ गये. आखिरकार नगर थाना पुलिस की मदद लेनी पड़ी.
दारोगा शिवशंकर कुमार दलबल के साथ पहुंचे और मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए पहुंचे लोगों को जम कर फटकार लगायी. सवाल यह उठता है कि डॉक्टर और प्रबंधन करें, भी तो क्या? जो व्यवस्था है, उसी में चिकित्साकर्मियों को काम करना पड़ रहा है. ज्ञात हाे कि सदर अस्पताल डॉक्टरों की कमी का सामना लंबे अरसे से कर रहा है. अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक अस्पताल उपाधीक्षक ने गुहार लगायी. यहां तक कि विभाग के बड़े अधिकारियों तक पत्र लिखा गया, लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हुई. जिले का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण यहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था नहीं होने के कारण अस्पताल के डाॅक्टर व कर्मियों को अक्सर दुर्व्यवहार के दौर से गुजरना पड़ता है.
