गैस सिलिंडर हादसे में झुलसे धर्मेंद्र की भी मौत

15 दिन पहले जा चुकी है साली की जान औरंगाबाद शहर : औरंगाबाद शहर के चितौड़नगर मुहल्ले में 17 दिन पूर्व हुए गैस सिलिंडर हादसे में गंभीर रूप से झुलसे धर्मेंद्र सिंह की मौत इलाज के दौरान गयी. धर्मेंद्र की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल कायम हो गया. चितौड़नगर से लेकर […]

15 दिन पहले जा चुकी है साली की जान
औरंगाबाद शहर : औरंगाबाद शहर के चितौड़नगर मुहल्ले में 17 दिन पूर्व हुए गैस सिलिंडर हादसे में गंभीर रूप से झुलसे धर्मेंद्र सिंह की मौत इलाज के दौरान गयी. धर्मेंद्र की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम का माहौल कायम हो गया. चितौड़नगर से लेकर खडिहा गांव तक लोग सकते में हैं. हर किसी के मुख से बस एक ही आवाज निकल रही है कि धर्मेंद्र के परिवार पर संकट का बादल छा गया.
13 फरवरी को चितौड़नगर में हुआ था सिलिंडर हादसा : 13 फरवरी को गैस सिलिंडर रिसाव के बाद चितौड़नगर मुहल्ले में धर्मेंद्र सिंह के घर आग लगी थी, जिसमें धर्मेंद्र सिंह, इनकी साली सरिता देवी, भारत गैस का मैकेनिक मिंटू कुमार, धर्मेंद्र और सरिता के दो बच्चे जसी कुमारी और साहिल कुमार गंभीर रूप से झुलस गये. आसपास के लोगों ने सभी को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को वाराणसी रेफर किया गया. इलाज के दौरान 20 फरवरी को सरिता देवी की मौत हो गयी. पता चला कि गुरुवार की रात वाराणसी के पोपुलर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. दोनों बच्चों का इलाज भी इसी अस्पताल में ही चल रहा है.
एजेंसी या बीमा कंपनी से नहीं मिली कोई मदद : एनएसयूआइ के जिलाध्यक्ष विवेक सिंह ने बताया कि घटना के 17 दिन बाद भी धर्मेंद्र सिंह के परिवार को किसी भी तरह की कोई सहायता उपलब्ध नहीं करायी गयी है. भारत गैस एजेंसी के मैनेजर ने कहा गया था कि एजेंसी द्वारा छानबीन के बाद पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध करायी जायेगी, पर इसमें अब तक कुछ भी नहीं हुआ. धर्मेंद्र के पांच छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय होता दिख रहा है. घटना के बाद परिवार का बुरा हाल है.
बीमा कंपनी को उठाना है इलाज का खर्च
गैस सिलिंडर से होनेवाले किसी भी तरह के हादसे के लिए सिलिंडर उपलब्ध करानेवाली कंपनियां बीमा कराती हैं. लेकिन, न तो ग्राहकों को और न ही गैस एजेंसियों में काम करनेवाले अधिकतर कर्मचारियों को इस बारे में पता है कि गैस कनेक्शन पर 25 लाख रुपये का बीमा मिलता है.
नियम के मुताबिक गैस एजेंसियों को बीमा से संबंधित सूचना नोटिस बोर्ड पर लगाना चाहिए, लेकिन इसका पालन किसी भी एजेंसी द्वारा नहीं किया जाता है. बीमा के प्रावधानों के मुताबिक दुर्घटना में घायल व्यक्ति के इलाज का पूरा खर्च गैस एजेंसी उठायेगी, लेकिन जानकारी के अभाव में ऐसा नहीं हो पाता है.

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