जनवरी महीने तक 291 धंधेबाज व शराबियों की हुई गिरफ्तारी
एकमात्र चेकपोस्ट पर भी व्यवस्था है बदहाल
औरंगाबाद शहर : 31 मार्च से बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी से शराबियों की संख्या थोड़ी घटी जरूर है, लेकिन शराब के अवैध धंधेबाजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है. इसकी पुष्टि पुलिस व उत्पाद विभाग के आंकड़े भी करते हैं और शराब के शौकीन भी.
आये दिन शराब के नशे में झूमते शराबी और धंधेबाज पुलिस के हत्थे चढ़ रहे हैं. शायद ही कोई दिन हो, जब पुलिस शराब से जुड़े मामले में खाली हाथ हो. पूर्ण शराबबंदी को प्रभावी तौर पर कारगर बनाने में जिला पुलिस के साथ-साथ उत्पाद विभाग भी पूरी तत्परता के साथ काम करने के दावे कर रहा है.
सिर्फ उत्पाद विभाग की बात करें, तो शराबबंदी के बाद यानी अप्रैल माह से चालू वर्ष के जनवरी माह तक 2390 जगहों पर उत्पाद पुलिस ने छापेमारी की. इस दौरान 295 मामले दर्ज किये गये और इन मामलों में 291 शराबियों व धंधेबाजों को गिरफ्तार किया गया. 1103.35 लीटर अवैध देशी शराब, 337.51 लीटर विदेशी शराब, 324 किलो गांजा बरामद किया गया. इतनी उपलब्धि होने के बावजूद उत्पाद विभाग कहीं न कहीं संसाधनों का अभाव झेल रहा है. पदाधिकारियों की कमी और किराये के वाहनों से अधिकारी भी परेशान हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि शराबबंदी के दौरान औरंगाबाद जिले के सीमाओं पर पांच चेकपोस्ट बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था. लेकिन जिले में एकमात्र चेकपोस्ट एनएच 139 पर कार्य कर रहा है, जिससे शराब के धंधे पर पूर्णत: रोक लगा पाना उत्पाद विभाग के लिए मुश्किल साबित हो रहा है.
शराबियों व धंधेबाजों की चपलता से पुलिस भी अपने अभियान में सफल नहीं हो पा रही है. उत्पाद विभाग के उत्पाद अधीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि उत्पाद पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. एकमात्र चेकपोस्ट से गुजरनेवाले वाहनों की जांच भी की जाती है. चेकपोस्ट से भी भारी मात्रा में नशीले पदार्थो की तस्करी करनेवाले धंधेबाजों को गिरफ्तार किया गया है.
