खून व पेशाब जांच करने की चल रहीं दुकानें, सेहत से हो रहा खिलवाड़
कंप्यूटर में फीड हस्ताक्षर से चलाया जा रहा काम
डिग्री दरकिनार, मरीजों के जीवन से हो रहा खेल
औरंगाबाद सदर : शहर में इन दिनों पैथोलॉजी की बाढ़ आ गयी है. इनमें से अधिकांश पैथोलॉजी सेंटर बिना निबंधन व डिग्री के चल रहे हैं. यदि आप किसी बीमारी की चपेट में हैं, तो खून व पेशाब की जांच कराने से पहले पैथोलॉजी सेंटर की जानकारी जरूर ले लें. यह सावधानी आपके सेहत के लिए बहुत जरूरी है. जिले में ऐसे न जाने कई पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं, जहां अप्रशिक्षित हाथों द्वारा खून व पेशाब की जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है. अनट्रेंड लोगों द्वारा न सिर्फ खून, पेशाब की जांच की जा रही है,
बल्कि जांच रिपोर्ट तैयार कर चिकित्सकों तक पहुंचायी जा रही है. ऐसी रिपोर्ट पर केवल पैथोलॉजिस्ट का डिजिटल या फिर सही सिगनेचर मात्र होता है. ऐसे में न जाने एक पैथोलॉजिस्ट कितने पैथोलॉजी की दुकानें चला रहे हैं. जांच कहीं और करते हैं और रिपोर्ट कहीं और तैयार होती है. जानकारी के अनुसार रिपोर्ट तैयार होने के बाद हस्ताक्षर कंप्यूटर में फीड सिगनेचर के आधार पर रिपोर्ट में चिपका दिया जाता है. शहर में शाहपुर रोड, महाराजगंज रोड व मदरसा रोड में ऐसे कई पैथोलॉजी लैब धड़ल्ले से चल रहे हैं.
शहर में 100 से भी अधिक पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं. पूरे जिले की रिपोर्ट खंगाली जाये, तो इसकी संख्या 500 से भी पार कर सकती है. हर प्रखंड मुख्यालय पर अप्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट अपनी दुकानें चला रहे हैं. कुछ चिकित्सकों का दावा है कि जिले में चल रहे अधिकांश पैथोलॉजी लैब के पास जांच करनेवाले व्यक्ति की डिग्री नहीं है. ऐसे लोग दूसरे पैथोलॉजिस्ट की डिग्री पर काम कर रहे हैं. ऐसे लोगों के पास क्लीनिकल पैथोलॉजिस्ट की कोई डिग्री नहीं है.
एक रिपोर्ट तैयार करने में लगते हैं 15 मिनट
चिकित्सकों की माने, तो साधारण खून व पेशाब की एक जांच रिपोर्ट तैयार करने में औसतन 15 मिनट लगते हैं. अगर इसका औसत मान लिया जाये, तो एक पैथोलॉजी सेंटर को 100 तरह की जांच करने में लगभग 24 से 25 घंटे लगेंगे,लेकिन शहर में ऐसे कई पैथोलॉजी सेंटर हैं, जो प्रतिदिन 100 से अधिक जांच रिपोर्ट तैयार करते हैं. ऐसे में जाहिर है कि इस तरह के पैथोलॉजी सेंटर कहीं न कही गलत रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को जान-बूझ कर मुसीबत में डाल रहे हैं.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
जिले में चल रहे पैथोलॉजी सेंटर में हो रही गड़बड़ी की जांच की जायेगी. पूर्व में सीएस कार्यालय से पांच वर्ष का निबंधन कुछ पैथोलॉजी का किया गया था. इसका अब तक भौतिक सत्यापन नहीं हो सका है. इन सभी लैबों का भौतिक सत्यापन किया जायेगा. जो भी अनट्रेंड लोग पैथोलॉजी चला रहे हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. ऐसे सेंटरो को बंद भी कराया जायेगा.
डाॅ आरपी सिंह, सीएस
नर्सिंग होम में भी जांच का खेल
कई ऐसे नर्सिंग होम हैं,जहां के चिकित्सकों ने पैथोलॉजी सेंटर खोल रखा है. नियमत: नर्सिग होम में एमबीबीएस चिकित्सक अपनी देखरेख में पैथोलॉजी सेंटर चला सकते हैं, हो यह रहा है कि चिकित्सक मरीज देखने में उलझे रहते हैं और जांच अनट्रेंड लोग करते हैं. जांच के बाद रिपोर्ट पर चिकित्सक का हस्ताक्षर व मुहर लगा दिया जाता है.
डॉक्टरों के रहमोकरम केंद्र
जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में फर्जी अल्ट्रासाउंड के विरुद्ध अभियान चलाया गया था. इसमें अधिकांश अल्ट्रासाउंड सेंटर के पास लाइसेंस नहीं पाये गये थे. उन्हें जांच के बाद अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी थीं. स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करनेवाले लोगों को सबक भी सिखाया गया था. एक बार फिर से जिला प्रशासन को स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर होने की आवश्यकता है. चिकित्सकों के रहमोकरम पर चल रही पैथोलॉजी की दुकानों पर जांच की आवश्यकता है.
