मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक चूड़ा-तिलकुट की सजीं दुकानें जमकर हो रही खरीदारी(फोटो नंबर-12,13)कैप्शन- तिलकूट की खरीदारी करते लोग, विभिन्न आइटमो में सजा तिलकूट(लीड) औरंगाबाद (सदर)मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो पूरे भारत वर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है, पर इसे विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. बिहार में भी मकर संक्रांति को धूमधाम से मनाये जाने की परंपरा है. लोग इस पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जानते हैं. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को न होकर 15 जनवरी को हो रहा है. ज्योतिष चंद्रनरेश पांडेय ने बताया कि 15 जनवरी को प्रात: सात बज कर 19 मिनट से संक्रांति का मुहूर्त है. इधर, मकर संक्रांति की तैयारी में लोग जुट रहे. बाजारों की रौनक भी बढ़ी है. चाहे कपड़े की दुकान हो या चूड़े-तिलकुट की वहां चहल-पहल बढ़ गयी है. पर्व पर चूड़ा, तिलकुट व दही खाने की विशेष परंपरा रही है. इसके कारण इसके विक्रेताओं को खूब चांदी कट रही है. शहर के विशेष स्थानों पर तिलकुट विक्रेता दुकानों को सजा कर ग्राहकों को लुभा रहे हैं. तथा बाहरी कारीगरों द्वारा कई अलग-अलग स्वादों से तिलकुट उपलब्ध करा रहे हैं. वहीं पूजन सामग्री आदि की बिक्री भी खूब हो रही है.तिलकुट 140 से 240 रुपये तक : शहर के तिलकुट विक्रेता जितेंद्र कुमार बताते हैं कि हर वर्ष वे तिलकुट के कारोबार करते हैं. मकर संक्रांति पर इस बार विशेष तैयारी की गयी है. नागपुर के कारीगरों द्वारा लजीज तिलकुट बनाया जा रहा है, जो लोगों के मुंह में घुलते ही वाह-वाह कहने पर मजबूर कर देगा. दुकान में साधारण तिलकूट व विशेष तिलकूट भी उपलब्ध है. दुकानदार बताते हैं कि इस वर्ष खोवे के तिलकूट का मूल्य 240 रुपये प्रति किलो है. तो स्पेशल 180 रुपये प्रति किलो तथा जनरल 140 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है. गुड़ के तिलकूट भी 180 के बिक रहे हैं. दही का एडवांस बुकिंग : मकर संक्रांति पर्व पर जहां एक ओर शहर के बाजारों में जगह-जगह तिलकुट व चूड़े की दुकानें सजी हैं वहीं शहर के होटलों में दही का एडवांस बुकिंग भी जारी है. एक सप्ताह पूर्व से दही की बुकिंग की जा रही है. होटल मालिक कृष्णा कुमार बताते हैं कि पहले से ही दही का आर्डर इतना अधिक ले लिया गया है कि अब बुकिंग लेना संभव नही हो रहा. ये बताते हैं कि शहर के कई होटलों की यही स्थिति है. मेरे यहां डेढ़ सौ ग्राहकों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है. इसके अलावे मिल्क पार्लर जहां पैकेट के दूध उपलब्ध रहते हैं वहां भी दूध की बुकिंग एडवांस में हो रही है. मकर संक्रांति का महत्व : शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतिक व उतरायण को देवताओ का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतिक माना गया है. इसलिए इस दिन जप-तप, दान, स्नान, श्राद्ध, दर्पण आदि का धार्मिक महत्व है. मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व : ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर आते हैं. चुकी शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. महाभारत काल में भिष्म पितामह ने अपने देह त्यागने के लिए इसी दिन का चयन किया था. यह भी माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे चल कर कपिल मुनी के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थी. मकर संक्रांति का नया पैमाना : अन्य त्योहारों की तरह मकर संक्रांति पर्व पर भी एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है. मकर संक्रांति के नये पैमाने में शुभकामना देने के लिए मैसेज व कार्ड भेजना का दौर शुरू है. लोग इस पर्व पर छोटे-छोटे मैसेज व्हाट्स अप व फेसबुक के जरीये भेजते हैं और इस पारंपरिक पर्व की बधाई देते हैं.
मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक
मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में बढ़ी रौनक चूड़ा-तिलकुट की सजीं दुकानें जमकर हो रही खरीदारी(फोटो नंबर-12,13)कैप्शन- तिलकूट की खरीदारी करते लोग, विभिन्न आइटमो में सजा तिलकूट(लीड) औरंगाबाद (सदर)मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो पूरे भारत वर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है, पर इसे विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. बिहार […]
