अति नक्सलग्रस्त टंडवा में विकास नगण्य

अति नक्सलग्रस्त टंडवा में विकास नगण्य शिक्षा, सिंचाई व बिजली समेत अन्य विकास कार्यों में काफी पिछड़ा है इलाका वर्षों से हो रही टंडवा को प्रखंड बनाने की मांग प्रतिनिधि, नवीनगर (औरंगाबाद)नवीनगर प्रखंड के अति नक्सलग्रस्त टंडवा थाना क्षेत्र की छह पंचायतें आजादी के वर्षों बाद भी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी व प्रशासन की उपेक्षा के […]

अति नक्सलग्रस्त टंडवा में विकास नगण्य शिक्षा, सिंचाई व बिजली समेत अन्य विकास कार्यों में काफी पिछड़ा है इलाका वर्षों से हो रही टंडवा को प्रखंड बनाने की मांग प्रतिनिधि, नवीनगर (औरंगाबाद)नवीनगर प्रखंड के अति नक्सलग्रस्त टंडवा थाना क्षेत्र की छह पंचायतें आजादी के वर्षों बाद भी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी व प्रशासन की उपेक्षा के चलते बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है. इस क्षेत्र के अधिकतर गांव अब तक पक्की सड़क से नहीं जुड़ सके हैं. यहां के किसान पूरी तरह वर्षा आधारित खेती करने पर निर्भर हैं. गौरतलब है कि टंडवा थाना क्षेत्र में कई नक्सली संगठन काफी सक्रिय हैं. इन संगठनों द्वारा लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम दिये जाने के कारण विकास के नाम पर इस क्षेत्र को अब तक कुछ भी नसीब नहीं हुआ है. चाहे वह टंडवा को प्रखंड बनाने की मांग हो या पुलिस व्यवस्था दुरुस्त करने की. शिक्षा, सिंचाई व बिजली समेत अन्य विकासोन्मुखी कार्यों के मामले में यह इलाका काफी पिछड़ा हुआ है. टंडवा थाना क्षेत्र के पुरहरा गांव के रहनेवाले रोहित अग्रवाल ने बताया कि बरसात के दिनों में इस क्षेत्र के लोगों का सड़क पर सफर करना मुश्किल ही नहीं, लगभग नामुमकीन सा हो जाता है. पिछले एक वर्ष से निर्माणाधीन नवीनगर-टंडवा पथ अब तक पूरा नहीं हो सका है. यदि गांव के किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ जाये, तो झोलाछाप चिकित्सकों के सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं रहता है. उप स्वास्थ्य केंद्र, टंडवा के निष्क्रिय होने के कारण झोलाछाप चिकित्सक उठा रहे हैं. पैक्स अध्यक्ष अश्विनी कुमार सौरभ ने बताया कि यदि जनप्रतिनिधि ईमानदारीपूर्वक थोड़ा भी पहल करते, तो आज टंडवा बाजार की स्थिति इतनी दयनीय नहीं होती. उन्होंने जनसमस्याओं से निजात दिलाने के लिए पहल शुरू करने की मांग की गयी है. समाजसेवी वीरेंद्र सिंह उर्फ गुरुजी ने कहा कि टंडवा को प्रखंड बनाये जाने की मांग वर्षों से उठायी जा रही है, लेकिन इस ओर भी किसी भी जनप्रतिनिधियों ने कोई सार्थक पहल नहीं की. टंडवा बाजार की स्थिति बदतर हो गयी है. पूर्व मुखिया भगवान सिंह का कहना है कि टंडवा बाजार दुर्गंध भरे नालियों के पानी से सदैव पटा रहता है. यदि स्थानीय लोग इस ओर पहल नहीं करें, तो बाजार आने-जाने वाले लोगों को नालियों की गंदगी से होकर गुजरना होगा. यहां साफ-सफाई जैसी कोई व्यवस्था नहीं है और नहीं जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देते हैं. रोहित अग्रवाल ने बाजार में साफ-सफाई के साथ-साथ पेयजल व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की मांग जनप्रतिनिधियों से की है. साथ ही, टंडवा बाजार में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने व जगह-जगह कूड़ेदान लगाने की मांग की है.

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