उत्सव के माहौल में कुंभकार मायूसी नवीनगर (औरंगाबाद)रोशनी का त्योहार दीपावली को लेकर शहर से गांव तक उत्सव का माहौल है. लेकिन प्रकाश के इस त्योहार से जुड़े कुंभकारों में मायूसी है. दीपावली के अवसर पर घरों व दुकानों में रोशनी के नाम पर बिजली का उपयोग व चकाचौंध ने एक ओर जहां आम नागरिकों को सुविधा प्रदान की है, तो मिट्टी का दीपक बनाने वाले कुंभकारों के जीवन में अंधकार छा गया है. हालत यह है कि दीपावली के अवसर पर नवीनगर शहर से लेकर छोटे-मोटे बाजार के सभी दुकानों पर मिट्टी के दीपक के बजाय बिजली के सजावटी सामान का भंडार देखा जा रहा है. रही सही कसर कलात्मक मोमबत्तियां पूरी कर रही है. कुम्हार ने बताया कि वर्षों पूर्व दीपावली के अवसर पर कुम्हारों को मिट्टी के दीये बनाने से फुरसत नहीं रहती थी, पर आज दीपावली के मौके पर मिट्टी के दीये की जगह बिजली व कलात्मक मोमबत्तियों के धड़ल्ले से उपयोग होने की वजह से कुम्हारों के समक्ष बेरोजगारी जैसी समस्या खड़ी हो गयी है. यही नहीं इस पर्व के अवसर पर मिट्टी से बने गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति की जगह पत्थर व प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बाजार में आने से भी कुंभकारों के हितों पर काफी प्रभाव पड़ा है. यही कारण है कि अधिकतर कुम्हार अपने इस पेशे को छोड़ दूसरे पेशे को अपना रहे हैं.
उत्सव के माहौल में कुंभकार मायूसी
उत्सव के माहौल में कुंभकार मायूसी नवीनगर (औरंगाबाद)रोशनी का त्योहार दीपावली को लेकर शहर से गांव तक उत्सव का माहौल है. लेकिन प्रकाश के इस त्योहार से जुड़े कुंभकारों में मायूसी है. दीपावली के अवसर पर घरों व दुकानों में रोशनी के नाम पर बिजली का उपयोग व चकाचौंध ने एक ओर जहां आम नागरिकों […]
