औरंगाबाद (ग्रामीण) : औरंगाबाद : जिले का हॉट सीट माने जानेवाला रफीगंज विधानसभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम महागंठबंधन के जदयू प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह के पक्ष में गया है. लगातार दूसरी बार रफीगंज से विधायक बने अशोक कुमार सिंह ने एनडीए के लोजपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार सिंह को शिकस्त दी है.
यहां की जनता ने प्रमोद सिंह के विकास के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए अशोक पर पुन: अपना भरोसा जताया है. मतगणना के प्रारंभ से ही जदयू प्रत्याशी ने अपनी बढ़त बनायी थी. हालांकि बीच-बीच में बढ़त कमजोर होती गयी, लेकिन मतगणना के आखिरी दौर में बढ़त को और बेहतर बना दिया. यहां की जनता ने अपने मताधिकार के बल पर महागंठबंधन प्रत्याशी को पुन: विजय दिलाया. यह सीट औरंगाबाद के सभी छह विधानसभा में हॉट सीट माना जा रहा था. कमात गांव के निवासी व छत्तीसगढ़ के व्यवसायी प्रमोद कुमार सिंह पूरे जोश खरोस के साथ यहां से चुनाव लड़ रहे थे.
प्रमोद सिंह ने चुनावी अभियान के पहले कई गांवों में विकास किया. नहर खुदाई, मंदिरों का निर्माण कराया, कई गांवों को सड़क से जोड़ा, बेटियों की शादी करायी, लेकिन इसका फल उन्हें नहीं मिला. प्रमोद के विकास के दावे को जनता ने नकार दिया और महागंठबंधन पर एक बार फिर भरोसा जताया.
बलवंत बिगहा के अशोक फिर बने बादशाह
रफीगंज विधानसभा क्षेत्र से अशोक कुमार सिंह जदयू प्रत्याशी के रूप में लगातार दूसरी बार विधानसभा में जीत हासिल की है. वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जदयू से फतह हासिल की थी. अशोक रफीगंज थाना क्षेत्र के ही दरमिया टोले बलवंत बिगहा गांव के रहने वाले हैं. अशोक के पिता रामाधार सिंह पूर्व में गुरुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं.
2010 के पहले रफीगंज से ही अशोक कुमार सिंह लोजपा प्रत्याशी के रूप में भाग्य आजमा चुके थे. हालांकि, उस चुनाव में उन्हें जीत हासिल नहीं हुई,लेकिन जनता ने उन्हें भरपूर सहयोग किया था और इसी के बदौलत 2010 के चुनाव में उन्होंने अपनी दावेदारी जदयू से पेश की थी और जीत हासिल की थी. उनकी पत्नी गृहिणी के साथ-साथ समाजसेविका भी है.
वर्ष 2003 में महेश सिंह यादव महाविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण किया. कॉलेज के दौरान ही उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. समाजसेवा के क्षेत्र में भी कई काम किये.
आज औरंगाबाद जिले में उनकी एक अलग पहचान है. पार्टी के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. यही कारण है कि पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच ये काफी लोकप्रिय हैं.
