अव्यवस्थित ऑटो पार्किंग से जाम की समस्या हुई आम

अव्यवस्थित ऑटो पार्किंग से जाम की समस्या हुई आम शहर में नहीं दिखती है ट्रैफिक व्यवस्था (फोटो नंबर-16)कैप्शन- शहर के पुरानी जीटी रोड पर जाम में फंसे वाहन औरंगाबाद (सदर) जरा कल्पना किजिये कि आपके वाहन से जा रहे हैं और आप के आगे किसी का वाहन है. दोनों वाहन गति से जा रही है […]

अव्यवस्थित ऑटो पार्किंग से जाम की समस्या हुई आम शहर में नहीं दिखती है ट्रैफिक व्यवस्था (फोटो नंबर-16)कैप्शन- शहर के पुरानी जीटी रोड पर जाम में फंसे वाहन औरंगाबाद (सदर) जरा कल्पना किजिये कि आपके वाहन से जा रहे हैं और आप के आगे किसी का वाहन है. दोनों वाहन गति से जा रही है और अचानक आगे वाली गाड़ी ब्रेक लगा दे, तो क्या होगा? स्पष्ट है कि ऐसी स्थिति में दुर्घटना होगी और नुकसान दोनों काे होगा. ऐसी स्थिति हर रोज शहर में दिखते हैं. ऐसी दुर्घटना सबसे अधिक किसी के साथ घटती है तो वह है ऑटो व अन्य गाड़ियां. शहर की यातायात व्यवस्था इतनी गड़बड़ है कि इसे देख कोई भी अनजान व्यक्ति कह दे कि लगता है यहां तो प्रशासन हैं ही नहीं. न कोई ट्रैफिक समझ और न कोई विधि व्यवस्था. ऐसे में जो भी वाहन सड़कों पर चल रहे हैं उनके अपने कायदे और कानून हैं. शहर के लोगों की राय जानने पर स्पष्ट होता है कि यहां सबसे गड़बड़ी ट्रैफिक व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानी उत्पन्न होती है. अव्यवस्थित ऑटो की पार्किंग, बेतरतिब तरीके से उसका परिचालन और बूम-बूम की तेज आवाज से बजते गीत कहीं से भी ट्रैफिक रूल के अनुरूप नहीं लगता. ऐसा लगता है कि ये सार्वजनिक रूप से बताना चाहते हैं कि सड़क सिर्फ हमारी है. रमेश चौक से धर्मशाला मोड़ तक जाम ही जामशहर का रमेश चौक सुबह नौ बजे तक चैन की सांस ले रहा होता है, लेकिन ज्यों ही सुबह के 10 बजते हैं कि टीं-टीं और पों-पों की आवाज से चौक गुंज उठता है और देखते ही देखते कुछ ही समय में पूरा शहर जाम की चपेट मे आ जाता है. सड़कों पर अतिक्रमण शुरू हो जाता है और ऑटो वालों की अपनी मनमानी भी. शहर के रमेश चौक से लेकर धर्मशाला मोड़ तक जाम ही जाम लगा रहता है और सड़कों पर सिर्फ ऑटो ही दिखता है. जाम में फंसे ऑटो को देख ऐसा प्रतित होता है कि मानो ऑटो की रैली निकली हो. पहले के प्रयास का कोई असर नहींशहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए जिला प्रशासन के तत्कालीन एसडीओ केडी प्रोज्जवल, प्रशिक्षु आइएस चंद्रशेखर प्रसाद व प्रशिक्षु आइपीएस हिमांशु शंकर त्रिवेदी ने एक मुहिम चलाकर शहर की यातायात व्यवस्था पर कार्य किया था. उसका परिणाम ये हुआ था कि कुछ ही दिनों में ऑटो के लिए तय रूट को ऑटो चालक फॉलो करने लगे थे. यहां तक कि ड्रेस कोड का भी अनुपालन नियमित कर रहे थे. जीरो टॉलरेंस पर जम कर काम किया गया था. ये पदाधिकारी सुबह जगते ही सड़क पर चल आते थे और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया करते थे. जहां भी गड़बड़ी या नियम तोड़ते पकड़े जाते थे उन पर कार्रवाई होती थी. लेकिन इनके तबादले के कुछ ही बाद सारे नियम व प्रयास पर पानी फिर गया. फिर से करना होगा प्रयास शहर सभी का है और इसे स्वच्छ व सुंदर रखना सामुदायिक प्रयास से ही संभव हैं. प्रशासन की नियत ये नहीं कि ऑटो चालकों को बेवजह दंडित करें. बल्कि एक कायदे से उन्हें परिचय कराये और शहर की यातायात व्यवस्था में सहयोगी की भूमिका के रूप में ऑटो चालक अपना योगदान दे, ऐसा प्रयास किया जाता रहा है. शहर के कुछ प्रबुद्ध लोगों की राय पर ये समस्या बार-बार उठती है और उनका कहना है कि गलती चाहे जो भी करें उन पर कार्रवाई होनी चाहिए. फिलहाल सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण और अव्यवस्थित परिचालन है. जल्द होगी कार्रवाई : शहरवासियों की चीख अब गले से बाहर नहीं निकल रही. बेबस राहगीर व वाहन मालिक अपनी समस्या जाहिर नहीं कर पा रहे. महंगी गाड़ियों का शौक व पैदल चलने की आदत वालों लोगों को ट्रैफिक व्यवस्था बेचैन कर रही है. परिवहन विभाग के एमवीआई रंजीत कुमार कहते हैं कि इस दिशा में जल्द ही कार्रवाई की जायेगी. चुनाव से पहले कार्रवाई की गयी थी, लेकिन उसका असर नहीं हुआ. फिर से तैयारी के साथ ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के ऊपर कार्रवाई की जायेगी और जीरो टॉलरेंस जोन के नियमों को भी लागू किया जायेगा.

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