बच्चों में बीमारी से लड़ने की क्षमता कम होती है, इसलिए बच्चों की देखभाल व सुरक्षा करना बहुत जरूरी है. बच्चों को गंदगी से बचाना होगा और उन्हें साफ सुथरा रखने में मदद करना होगा तभी वह स्वस्थ रहेंगे. प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों को कई तरह के सुझाव भी दिये.
उन्होंने शून्य से छह वर्ष व छह से 18 वर्ष तक के बच्चों में होने वाली 30 बीमारियों के बारे में बताया. बच्चों में खास कर जन्मजात, बहरापन, होठ कटे, मानसिक बीमारी सहित अन्य कई लक्षण पाये जाते है. माता-पिता को जन्म लेते ही बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत होती है. बच्चों को साफ -सुथरा रखना उनका फर्ज होता है. डॉ एमके समी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों की एक टीम तैयार कर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच करायी जायेगी. इसके साथ ही स्वास्थ्य से संबंधित उन्हें जानकारी भी दी जायेगी. इस मौके पर डॉ अवधेश मिश्र, डॉ रीतु कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे.
