औरंगाबाद (नगर) : सरकार के नगर विकास व आवास विभाग ने सभी नगर पर्षदों व नगर पंचायतों को शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है. लेकिन, अभी तक सरकार के दिये गये आदेश के प्रति औरंगाबाद नगर पर्षद के जिम्मेवार ठेंगा दिखाते हुए गंभीर नहीं हुए हैं.
सरकार द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि सभी नगर आयुक्त व कार्यपालक पदाधिकारी छह बजे प्रात:क्षेत्र भ्रमण पर जायेंगे और शहर की सफाई का निरीक्षण करेंगे. सरकार द्वारा यह आदेश 25 मार्च 2015 को ही दिये गये है,लेकिन औरंगाबाद नगर पर्षद द्वारा अभी तक इस पर कोई रणनीति नहीं बनायी गयी है. पुराने धरे पर ही काम किया जा रहा है.
नगर पर्षद द्वारा देवा कंस्ट्रक्शन को ठेका पर शहर की सफाई की पूरी व्यवस्था सौंपी गयी है. लेकिन, जिस तरह से शहर साफ सुथरा दिखना चाहिए, कहीं नहीं दिखता. इस स्थिति में शहर के लोग सफाई व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट भी नहीं है. हालांकि, हर रोज सफाईकर्मी साफ-सफाई में लगाये जाते हैं. फिर भी सड़कों पर गंदगी ही मिलती है. शहर के कई गलियों में तो महीनों में सफाई नहीं होती है. शहर के कुछ ऐसे मुहल्ले हैं, जहां पर नगर पर्षद को जब मन होता है, तब सफाई की जाती है. इनमें महुआ शहीद मुहल्ला, नागा बिगहा, पटेल कॉलोनी, शिवपुरी नगर, शक्तिनगर, जय मां कॉलोनी सहित अन्य मुहल्ला शामिल हैं.
सड़कों को गंदा करने में व्यवसायियों की बड़ी भूमिका : ओम प्रकाश
शहर की सफाई आउट सोर्सिग से होती है. ठेका पर देवा कंस्ट्रक्शन चलाने वाले ओम प्रकाश ने बताया कि नगर पर्षद क्षेत्र की सड़कें एक तरफ से साफ होती है तो दूसरी तरफ कुछ ही देर बाद उन पर गंदगी दिखाने लगती है. खासकर यह स्थिति है शहर की दो प्रमुख सड़कें पुरानी जीटी रोड व एमजी रोड की. सड़कों को गंदा करने में यहां के व्यवसायियों की भी बड़ी भूमिका है. व्यवसायी अपनी-अपनी दुकानों को खोलने के बाद भीतर की गंदगी को सड़कों पर या नाले में फेंक देते हैं. इस लिए सुबह की सफाई कुछ ही देर में गंदगी में तब्दील नजर आती है.
- शहर में दिन हो या रात ट्रैक्टर से बालू ढुलाई होती है. ट्रैक्टर वाले बालू की कीमत अधिक पाने के लिए ओवर लोडिंग कर बालू आते हैं. बालू सड़कों में गिरती जाती है. इससे भी सड़कों पर गंदगी दिखती है. इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ दिन पहले जागरूकता अभियान पूरे शहर में चलाया गया. व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में डोर टू डोर जाकर लोगों से आग्रह किया गया कि दुकान से निकले गंदगी को कूड़ेदान में डाले, लेकिन इसका प्रभाव केवल उतना ही दिन तक दिखा जितना दिन तक जागरूकता अभियान चला.
