अर्श पर अस्पताल का नाम, रात में गंदे फर्श पर परिजन

औरंगाबाद : सुबह के चार बज रहे थे. जिले के मॉडल अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल के बरामदे में गंदे जमीन पर मरीज व उनके परिजन बेफिक्र होकर सोये हुए थे. प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने वार्ड में जाकर पड़ताल की, तो वहां भी बेड के नीचे जमीन पर कई मरीज व उनके परिजन […]

औरंगाबाद : सुबह के चार बज रहे थे. जिले के मॉडल अस्पताल कहे जाने वाले सदर अस्पताल के बरामदे में गंदे जमीन पर मरीज व उनके परिजन बेफिक्र होकर सोये हुए थे. प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने वार्ड में जाकर पड़ताल की, तो वहां भी बेड के नीचे जमीन पर कई मरीज व उनके परिजन लेटे थे.कई अपने सर के नीचे चप्पल रख कर इस कदर सोये थे जैसे वो किसी आरामदेह विस्तर पर हो. दिन भर मरीज को दिखाने, दवा उपलब्ध कराने व पूरे दिन सेवा करने के बाद थके मरीज के परिजनों को इस बात का भी होश नहीं था कि वो जिस फर्श पर सोये है वो बेहद गंदा व विषाणुओं से भरा पड़ा है.

वैसे तो स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार रोज डंके की चोट पर यह कहती है कि चौहुमुखी विकास हो रहा है. स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था सुदृढ़ पर, स्वास्थ्य व्यवस्था का ऐसा नजारा देखकर कोई भी डर जायेगा. मरीज के परिजनों के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण उन्हें अपने मरीज के साथ ही वार्ड में मरीज के बेड के नीचे सोना पड़ता है.
बरसात में विषधारियों का डर
बरसात के मौसम में जहरीले सांप, बच्छू, कनगोजर का निकलना आम बात है. रात में अस्पताल के अंदर फर्श पर सोने वाले मरीज या उनके परिजनों को इन विषधारियों से बेहद खतरा है.
जमीन पर सो रहे लोगों को अगर सांप, बिच्छू या कनगोजर डंस लेता है, तो उनकी जान चली जायेगी. सवाल उठता है कि किसी प्रकार की अनहोनी होने पर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. वैसे सदर अस्पताल प्रशासन इस बात से बिल्कुल अनभिज्ञ है. उसे इन सबसे कोई लेना देना नहीं है.
इंफेक्शन से होगी गंभीर बीमारी
सदर अस्पताल के जेनरल वार्ड से लेकर बरामदे तक मरीज व उनके परिजन सोये रहते है. यहां फर्श पर खतरनाक वायरस, बैक्टरियां व फंगी के होने के कारण मरीज व उनके परिजनों को खतरनाक बीमारियों की आशंका बनी हुई है. इन माइक्रो बैक्टरिया का इंफेक्शन हो जाता है, तो कई गंभीर बीमारियों हो सकती है. ऐसे में संभालना मुश्किल हो सकता है.
अस्पताल में मरीजों के परिजन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. अटेंडेंट कक्ष नहीं है. ऐसे में मरीज के साथ आने वाले परिजनों को रात में रुकने परेशानी होती है. सरकार द्वारा अस्पताल में अटेंडेंट कक्ष बनाये जाने के बाद समस्या का समाधान हो पायेगा.
डॉ मिथिलेश सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, औरंगाबाद

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