दाउदनगर : सरकार द्वारा मनरेगा के तहत गांवों में व ग्रामीण सड़कों पर पौधारोपण कर गांव को हरा भरा बनाये रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन विभागीय लापरवाही कहें या फिर कुछ और कहीं कहीं पौधों का अस्तित्व तक नजर नहीं आता. इसी तरह का एक उदाहरण दाउदनगर प्रखंड के शमशेर नगर पंचायत में राजकुमार बिगहा- महारानी बिगहा पथ में भी देखा जा सकता है.
यहां पर लगे बोर्ड पर यदि गौर करें, तो इस रोड में महारानी बिगहा तक दो लाख 93 हजार 400 रुपये की लागत से पौधे लगाये जा चुके हैं, जिसकी स्वीकृति तिथि 22 सितंबर 2016 है. योजना संख्या 3/2016-17 की कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत शमशेर नगर है. यह तो हो गयी योजना की स्थिति. लेकिन, इसके विपरीत वर्तमान स्थिति देखी जाये, तो एक वर्ष बाद सड़क पर पौधे नजर नहीं आयेंगे और न ही इसका अस्तित्व देखने को मिल पा रहा है. विभागीय दावा अलग है, तो ग्रामीणों का दावा अलग. ग्रामीण व महारानी बिगहा निवासी युवा राजद नेता अमरेश कुमार यादव का कहना है कि इस सड़क पर पौधारोपण कभी हुआ ही नहीं. उन्होंने कभी पौधा लगा देखा ही नहीं.
वहीं इसके विपरीत विभाग का दावा है कि एक यूनिट पौधा लगाया गया था जो वनपोषक की लापरवाही के कारण समाप्त हो गया है. अब तो यह जांच का विषय है कि सचमुच में सड़क किनारे पौधारोपण किया गया था या नहीं. श्री यादव ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे डीएम से मिलने जा रहे हैं. जिस समय की यह योजना है ,उस समय शमशेर नगर पंचायत की मुखिया अमृता देवी थीं, जिनकी सदस्यता रद्द हो गयी है.अब सवाल यह उठता है कि यदि सचमुच में एक वर्ष पूर्व पौधारोपण हुआ था तो एक वर्ष में ही पौधे के बर्बाद होने का क्या कारण हो सकता है. इसकी जवाबदेही किसके ऊपर आ सकती है.
पीओ ने बताया कि पौधा लगाया गया था, वन पोषक सही तरीके से काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण पौधा समाप्त हो गया है. फिलहाल काम को स्थगित कर दिया गया है, वन पोषक को हटा दिया गया है.
