खतरा. गलियों में भी लगने लगी है रेस, बढ़ रही दुर्घटनाओं की तादाद
21वीं सदी में जीवन की रफ्तार काफी तेज हो गयी है. ज्यादातर लोग हमेशा एक-दूसरे से आगे निकलने की फिराक में रहते हैं. वैसे आगे जाने में कोई बुराई नहीं है, पर समस्या यहां से शुरू होती है, जब हम सभी दूसरों की परवाह किये बगैर आगे निकलना चाहते हैं. शहर की सड़कों पर आये दिन ऐसा ही हो रहा है. इसका नतीजा दुर्घटना के तौर पर सामने आ रहा है. सड़कों पर बाइक राइडर्स की लापरवाही से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं.
औरंगाबाद सदर : आज के युवा रफ्तार के रोमांच में इतनी गहराई तक उतर गये है कि उन्हें दूसरों की फिक्र तो दूर, खुद की जिंदगी की फिक्र भी नहीं. यही वजह है कि ऐसे लोगों के दिल में कानून का भी भय नहीं दिखता. यही नहीं इनमें अभिभावकों का भी डर नहीं. तेज बाइक और सुपर बाइक के शौकिन युवाओं की संख्या शहर में लगातार बढ़ रही है.
जो न सिर्फ रियल लाइफ में वीडियो गेम की तरह रफ्तार में बाइक चलाना पसंद करते हैं, बल्कि हवाओं से बात करना इन्हें खूब भाता है.
लेकिन, शहर की सड़कें ऐसे सुपर राइडर्स को झेलने के लायक नहीं और नतीजा यह है कि आये दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं. सड़क सुरक्षा के नियमों का इन पर कोई असर नहीं दिखता.
रोज परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और विभागीय स्तर पर सुस्ती व लापरवाही बरती जा रही है. इसी का परिणाम है कि तीन दिन पूर्व नगर थाना के दारोगा मो तलहा बेखौफ बाइक राइडर्स के शिकार हो चुके है. तेज बाइकसवार की टक्कर से मो तलहा पूरी तरह जख्मी हो गये और एक हाथ-पैर में गंभीर चोट भी आयी.
शहर की सड़कों पर नहीं है गति अवरोधक : शहर के पुराने जीटी रोड को कई बार नये तरीके से बनाया गया और बीच-बीच में थोड़े-बहुत काम किये जाते रहे, लेकिन इस सड़क पर कहीं भी गति अवरोधक नहीं बनाया गया.
दोपहिया सहित चारपहिया वाहनों की स्पीड को कम करने के लिए गति अवरोधक नहीं होने से स्पीड पर किसी का कंट्रोल नहीं. महाराजगंज रोड व रमेश चौक से जसोइया की ओर जानेवाली सड़क की स्थिति यह है कि इस सपाट रास्ते पर शाम ढलते ही मोटरसाइकिल के दीवानों की महफिल जमनी शुरू हो जाती है.
इसके साथ ही शुरू होता है रोड रेस व स्टंट का खेल. बेरोकटोक ये 80 से 100 की स्पीड में शहर के अंदर अपनी वाहन से फर्राटे भरते हैं. इनकी स्पीड इतनी होती है कि वे पुलिस के पकड़ में भी नहीं आते.
ऐसे टूट रहे नियम
शहर में मोटरसाइकिल चालक हेलमेट का प्रयोग नहीं करते. सड़क पर अपनी लेन में चलने के बजाय उलटे साइड में बाइक राइडिंग बेखौफ जारी है. वाहन चलाते समय लोग मोबाइल का प्रयोग भी धड़ल्ले से करते हैं. गति सीमा का बंधन भी कागज तक ही सिमटा हुआ है. भीड़-भाड़ व गली मुहल्लों में भी फर्राटे से दौड़ते हैं. शहर में अिधकतर हादसे इन्हीं कारणों से हो रहे हैं.
परिवहन नियमों का बना मखौल
मोटर वाहन अधिनियम में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का वाहन चलाना गैरकानूनी है. विभाग द्वारा 16 से 18 साल के बच्चों को बिना गियर के दोपहिया वाहन चलाने का ही लाइसेंस देने का प्रावधान है.
नियम का पालन नहीं करने पर केंद्रीय मोटरयान नियम 1988 की धारा 19 व केंद्रीय मोटरयान नियम के नियम 21 के प्रावधान अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त या निलंबित किया जा सकता है. बावजूद इसके बाइक राइडर्स पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही. शहर में नियमों को ताक पर रखकर बाइक राइडर्स एक नया कल्चर शुरू कर रहे हैं, जिससे सड़क हादसे बढ़ने लगे हैं.
तय गतिसीमा में ही चलाएं वाहन
दोपहिया वाहनचालक हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें
क्रासिंग या भीड़-भाड़वाले इलाके में वाहन धीरे चलाएं
वाहन परिचालन के दौरान मोबाइल का प्रयोग नहीं करें
वाहन परिचालन के समय ट्रैफिक नियमों का पालन करें
सड़क पर हमेशा बायीं ओर से चलें.
नहीं संभले, तो होगी कार्रवाई
ट्रैफिक नियमों के अनुपालन के लिए ऐसे बाइक चालकों के विरुद्ध सघन जांच अभियान समय-समय पर चलाया जाता है. शहर में फारम एरिया, ओवरब्रिज व जसोइया मोड़ पर इसके लिए चेक नाका बनाया गया है.
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन करते पकड़े जाने पर उन्हें आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है. अगर इसके बाद भी यह नहीं संभल रहे, तो इन पर कार्रवाई की जायेगी. वैसे अभिभावकों से अपील है कि अपने बच्चों को तेज गतिवाले वाहन बिना सोचे-समझे खरीद कर न दें. सुपर बाइक की सवारी अच्छी है, पर रफ्तार से युवाओं को तौबा करनी चाहिए.
राजेश कुमार वर्णवाल, नगर थानाध्यक्ष, औरंगाबाद
