अधिवक्ता समेत तीन लोगों को बनाया गया आरोपित
विस्फोटक अधिनियम से जुड़ा है मामला
औरंगाबाद कार्यालय : मुफस्सिल थाना कांड संख्या 56/14 में अप्राथमिकी आरोपित का नाम अनुसंधान में आने के बाद आरोपित की जगह पर अज्ञात व्यक्ति द्वारा न्यायालय में सरेंडर किये जाने का मामला प्रकाश में आया है.
हालांकि यह मामला लगभग एक माह पुराना है, लेकिन इस मामले में एक और प्राथमिकी नगर थाना में दर्ज की गयी है, जिसमें मुंगेर जिले के सतुरखाना थाना क्षेत्र के सलमेपुर निवासी वाहिद आलम, व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी और सरेंडर करनेवाले अज्ञात व्यक्ति को आरोपित बनाया गया है.
मामला यह है कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. इसमें कई लोग आरोपित बने थे. अनुसंधान की जिम्मेदारी सीबी टीम रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद के इंस्पेक्टर शिवध्वज राम को मिली थी. अनुसंधान के क्रम में अप्राथमिकी आरोपित का नाम वाहिद आलम के रूप में सामने आया. 7 सितंबर 2017 को न्यायालय से अनुसंधानकर्ता को पत्र प्राप्त हुआ कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया है.
पुलिस ने 20 सितंबर को उसे रिमांड पर लेने के लिए अनुरोध पत्र न्यायालय में दाखिल किया, जिसके बाद मंडल कारा से वाहिद को पुलिस ने रिमांड पर ले लिया. अनुसंधान के क्रम में पता चला कि जिस व्यक्ति ने न्यायालय में सरेंडर किया है, वह वाहिद नहीं बल्कि कोई और है. यानी कि वाहिद आलम की जगह पर अज्ञात व्यक्ति को वाहिद बता कर न्यायालय में सरेंडर किया गया और सरेंडर का सारा कागजात अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी ने तैयार किया.
सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक पुलिस को यह मालूम भी नहीं कि वाहिद के जगह वाहिद बन कर सरेंडर करने वाला कौन है. फिलहाल प्राथमिकी दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है. नगर थानाध्यक्ष राजेश वर्णवाल ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज की गयी है, जिसमें वाहिद आलम, अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी और अज्ञात व्यक्ति को आरोपित बनाया गया है.
