पुलिस ने हत्यारे बहनोई को किया गिरफ्तार
दाउदनगर अनुमंडल : खुदवां थानाक्षेत्र के लहसा गांव निवासी रामाधार सिंह की छोटी पुत्री 30 वर्षीया आशा देवी अपने जिस बहनोई पर आंख मूंदकर भरोसा करती थी,वही बहनोई उसका हत्यारा निकला. पुलिस ने मृतका के बहनोई दाउदनगर थाना क्षेत्र के बुलाकी बिगहा निवासी बालेश्वर यादव को लहसा गांव से ही शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है.जब पुलिस लहसा गांव में उसके ससुराल में छानबीन करने पहुंची तो वह पलंग के नीचे छिप गया और जब उसे पकड़कर पूछताछ की गयी तो घटना की परतें खुलती गयीं और वही हत्यारा निकला. उसने आशा की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त किया गया धारदार हथियार भी घटनास्थल के पास के एक खेत से बरामद कर लिया गया है.
ए सडीपीओ संजय कुमार ने दाउदनगर थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में आशा हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि ससुराल की संपत्ति में हिस्सेदारी को समाप्त करने और मृतका के ससुराल वालों को आशा हत्याकांड में फंसाने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश के तहत उसने आशा को भरोसे में लेकर मंगलवार को दाउदनगर -हसपुरा रोड के संसा महेंद्राचक के बीच सुनसान इलाके में ले जाकर उसे बहला फुसलाकर झांसे में लेकर अचानक दबिया से वार कर उसकी निर्मम हत्या कर डाली.बुधवार की सुबह उसका शव बरामद किया गया. शव पर आधार कार्ड रखने का मकसद यह था कि शव की पहचान आसानी से हो सके और घर पर आसानी से पहुंच जाए तथा उसकी हत्या के आरोप में मृतका के पति व परिजनों को फंसा सके.वह अपने इस मकसद में लगभग कामयाब भी हो चुका था,लेकिन पुलिस की पैनी निगाह से वह बच नहीं सका.
अपने नाम से लिखयी जमीन
लहसा निवासी रामाधार सिंह की सिर्फ दो पुत्रियां हैं,कोई पुत्र नहीं है. इनकी साढ़े सात बीघा जमीन में से चार बिगहा बालेश्वर अपने नाम पर लिखवा चुका है. शेष साढ़े तीन बीघा जमीन विवादित है ,जिस पर मृतका के पिता के भाई का कब्जा है. बालेश्वर ने आशा की शादी अपने रिश्तेदार दाउदनगर थाना क्षेत्र के हिच्छन बिगहा निवासी अभय सिंह से वर्ष 2011 में करवायी थी.
एसडीपीओ ने बताया कि बड़े दामाद द्वारा जमीन लिखवा लेने के बाद आशा के ससुराल वालों ने प्रताड़ित करना शुरु कर दिया,जिसके संबंध में दाउदनगर थाना में केस नंबर 180/17 दर्ज है. इस दौरान दोनों साढ़ू के परिवार के बीच कुछ तनातनी हुई थी,जिसके बाद उसने आशा से पति के खिलाफ एसडीओ कोर्ट में सनहा दिलवाया था. इसके बाद बालेश्वर ने ऐसा षड्यंत्र रचा कि जमीन की हिस्सेदारी में दावेदारी भी समाप्त हो जाये और मृतका के ससुराल वाले भी फंस जाये. दूध का कारोबार करने वाले बालेश्वर लालच में पड़ कर अपनी साली का हत्यारा बन गया.
72 घंटे में हुआ उद्भेदन
मृतका का शव मिलने के 72 घंटे के भीतर थानाध्यक्ष अभय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने इस हत्याकांड का उद्भेदन कर लिया है. उद्भेदन टीम में पुलिस इंस्पेक्टर रवींद्र प्रसाद,सब इंस्पेक्टर शेखर सौरभ,शौकत खां,आशीष कुमार शाह एवं अरविंद कुमार शामिल थे. एसडीपीओ ने बताया कि थानाध्यक्ष जब ओबरा पहुंचे तो वहां और दाउदनगर में मृतका और उसके बहनोई बालेश्वर यादव के एक साथ देखे जाने की बात पता चला. आशा शनिवार को अपना इलाज कराने ओबरा पहुंची थी,जहां मंगलवार को पुनः बुलाया गया था. उसी दौरान बालेश्वर ने उससे मिलकर मंगलवार को दाउदनगर बुलाया था.मंगलवार को अपनी मां को गाड़ी पर बैठा कर वहीं रुक गयी़ जहां से बालेश्वर उसे वहां से दाउदनगर ले आया और हसपुरा बाजार ले गया. हसपुरा से घटनास्थल पर लाकर उसकी हत्या कर दी.
हत्या का चलेगा मुकदमा
आशा हत्याकांड में मृतका के पिता द्वारा पति समेत तीन को नामजद आरोपित बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी,अब हत्या का यह मुकदमा मृतका के बहनोई बालेश्वर यादव के खिलाफ चलेगा,लेकिन ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला चलता रहेगा,जिसमें पति को छोड़ कर अन्य आरोपित जमानत पर हैं. पति को भी दहेज प्रताड़ना के मामले में गिरफ्तार किया जायेगा. जल्द ही चार्जशीट दाखिल किया जायेगा.
