पुनपुन घाट पर पिंडदान करने पहुंचे लोग

पितृपक्ष मेला प्रारंभ, जम्होर में सुविधाओं की खली कमी पूर्वजों को पिंडदान कर गया के लिए हुए रवाना तिथि का क्षय होने से 15 दिनों के होंगे 16 श्राद्ध औरंगाबाद नगर : 15 दिवसीय पितृपक्ष मेला मंगलवार से शुरू हो गया. मेला के प्रथम दिन हजारों की संख्या में पिंडदानी देश के विभिन्न भागों से […]

पितृपक्ष मेला प्रारंभ, जम्होर में सुविधाओं की खली कमी
पूर्वजों को पिंडदान कर गया के लिए हुए रवाना
तिथि का क्षय होने से 15 दिनों के होंगे 16 श्राद्ध
औरंगाबाद नगर : 15 दिवसीय पितृपक्ष मेला मंगलवार से शुरू हो गया. मेला के प्रथम दिन हजारों की संख्या में पिंडदानी देश के विभिन्न भागों से पिंडदान करने के लिए जिले के जम्होर व सिरिस स्थित पुनपुन नदी पर पहुंचे, जहां पूर्वजों को पिंडदान किया. इसके बाद सभी पिंडदानी गया शहर के लिए रवाना हो गये. इधर, इन दोनों नदी घाटों पर जिला प्रशासन द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गयी है, ताकि पिंडदान करनेवाले लोग वहां ठहर या विश्राम कर सकें. जम्होर पुनपुन घाट पर किसी तरीके की सुविधा नहीं होने के कारण मजबूरी में विष्णु घाट पर पिंडदान कराया गया.
पंडित कुंदन पाठक मलय ने बताया कि सुविधाओं का घोर अभाव है, फिर भी छत्तीसगढ़, ओड़िसा, इलाहाबाद, मध्यप्रदेश सहित अन्य जगहों से लोग पहुंचे. वही पुनपुन घाट पर पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव हुआ, लेकिन सुविधा नहीं होने से पिंडदानी पुनपुन नदी में पिंड अर्पित कर गया के लिए रवाना हो गये. पुजारी ने कहा कि दिवंगत पुरखों के प्रति श्राद्ध की अभिव्यक्ति को 16 दिवसीय श्राद्धपक्ष इस बार 15 दिन का रहेगा. लगातार दूसरे वर्ष तिथि घटने से पितृपक्ष का एक दिन कम हो गया है.16 दिन के श्राद्धपक्ष का संयोग अब वर्ष 2020 में बनेगा. श्राद्ध छह सितंबर को पूर्णिमा से शुरू होंगे. इसी दिन दोपहर में प्रतिपदा का श्राद्ध भी होगा. 15 दिन बाद 20 सितंबर को स्वयं पितृ अमावस्या पर श्राद्ध का समापन होगा. हिंदू धर्म में श्राद्ध पितरों का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है.
पूर्णिमा से अमावस्या तक यह 16 दिन का होने से इसे सोलह श्राद्ध कहते हैं, लेकिन तिथियां घटने-बढ़ने के साथ इसके दिन कम-ज्यादा होते हैं. विद्वानों ने बताया कि लगातार दूसरे साल 16 दिवसीय श्राद्ध 15 दिन के होंगे. छह सितंबर को सूर्योदय से पूर्णिमा होने से सुबह पूर्णिमा का श्राद्ध होगा. दोपहर 12.32 बजे प्रतिपदा लग जायेगी. इसके चलते कई लोग इस दिन प्रतिपदा का श्राद्ध भी करेंगे. श्राद्ध पूजन और ब्राह्मण भोज के समय दिन का बताया. वहीं कुछ लोग बीच में पंचमी तिथि का क्षय होना भी बता रहे हैं.
इस तरह पितृपक्ष का पूरा एक दिन घटने में श्राद्ध के पूरे 16 दिन नहीं होंगे. सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार श्राद्ध में पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. इसमें खरीदी से कोई नुकसान नहीं है.
श्राद्ध पक्ष में अमृत सिद्ध होगा यह योग : श्राद्ध के दौरान आठ सितंबर को दोपहर 12.31 बजे अमृत सिद्ध योग 11 सितंबर को सुबह 9.21 से रवि योग, 12 सितंबर को सुबह 6.16 से स्वार्थ सिद्ध योग, 14 सितंबर को रात दो बजे स्वार्थ सिद्ध योग लगेगा, जो 15 सितंबर तक रहेगा. 17 सितंबर को भी मंगल उदय हो रहा है. इन योग में पूजा दान, खरीदारी आदि कर सकते हैं.
15 दिन में कब पड़ेगी कौन सी तिथि : छह सितंबर को पूर्णिमा प्रतिपदा, सात सितंबर को द्वितीया, आठ सितंबर को तृतीया, नौ को चतुर्थी व पंचमी, 10 को पंचमी, 11 को षष्ठी, 12 को सप्तमी, 13 को अष्टमी, 14 को नवमी, 15 को दशमी, 16 को एकादशी, 17 को द्वादशी, 18 को त्रयोदशी, 19 को चतुर्दशी, 20 को अमावस्या तिथि का श्राद्ध होगा.

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