शराब के मामले में फंसाने का डर दिखा कर वसूले 85 हजार

शर्मनाक. मुफस्सिल थाने की पुलिस पर यूपी के व्यवसायियों ने लगाये आरोप हजारीबाग से लौटने के दौरान थाने के सामने दारोगा का कारनामा थानेदार ने किया आरोप से इनकार औरंगाबाद कार्यालय : रियल स्टेट से जुड़े उत्तरप्रदेश के (व्यवसायी) को शराब के नाम पर फंसा कर 85 हजार रुपये मुफस्सिल पुलिस द्वारा उगाही किये जाने […]

शर्मनाक. मुफस्सिल थाने की पुलिस पर यूपी के व्यवसायियों ने लगाये आरोप

हजारीबाग से लौटने के दौरान थाने के सामने दारोगा का कारनामा
थानेदार ने किया आरोप से इनकार
औरंगाबाद कार्यालय : रियल स्टेट से जुड़े उत्तरप्रदेश के (व्यवसायी) को शराब के नाम पर फंसा कर 85 हजार रुपये मुफस्सिल पुलिस द्वारा उगाही किये जाने का मामला प्रकाश में आया है. आरोप लगा है एएसआइ अजय कुमार पर.
मुफस्सिल थाना से लेकर सदर अस्पताल तक हाइ वोल्टेज ड्रामा चला. सच कहा जाये, तो मुखिया सुजीत सिंह प्रकरण को फिर से दुहराया गया. ये अलग बात है कि इस बार अंबा थाना के बजाय प्रकरण का गवाह मुफस्सिल थाना बना.
हालांकि, व्यवसायियों से 85 हजार रुपये लिये जाने की बात को थानाध्यक्ष राजेश कुमार और एएसआइ अजय कुमार ने पूरी तरह बेबुनियाद बताया. थानाध्यक्ष ने कहा कि न तो व्यवसायियों को फंसाने की कोशिश की गयी और न रुपये ही लिये गये. आरोप तो कुछ भी लगा दिया जाता है, पर सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होती है.
क्या है मामला : उत्तरप्रदेश राज्य के महमूदगंज थाना क्षेत्र के तुलसीपुर निवासी संतोष सिंह, गाजीपुर के बसुका निवासी अंजनी सिंह और वाराणसी के चितुपुर निवासी भगत सिंह गुरुवार की शाम को हजारीबाग से यूपी के लिए अपनी फार्च्यूनर गाड़ी से निकले थे. रात नौ बजे के करीब मुफस्सिल थाना के ठीक सामने एनएच दो पर पुलिस ने गाड़ी रोकी और फिर उन्हें डरा-धमका कर शराब पीने का आरोप लगा कर सदर अस्पताल में मेडिकल जांच करायी गयी.
व्यवसायियों ने बताया कि वे कभी शराब पीते ही नहीं, बावजूद शराब पीने का आरोप लगाया गया और फिर पैसे की मांग की गयी. उनके बैग में रखे पैसों पर पुलिसकर्मियों की नजर पड़ गयी, फिर पैसे के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया.
मैनेज करने के दौरान 85 हजार रुपये में छोड़ने की बात बनी. पैसे लेने के बाद मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया. वाराणसी के तुलसीपुर निवासी संतोष सिंह ने मुफस्सिल थानाध्यक्ष के सामने कहा कि छोड़ने के नाम पर उनसे 85 हजार रुपये लिये गये.
चंद मिनटों में बदल गयी डॉक्टर की रिपोर्ट !
पता चला कि सदर अस्पताल के डॉक्टर आशुतोष कुमार ने तीन व्यवसायियों में सिर्फ भगत सिंह के शराब पीने की पुष्टि की. इसके बाद भगत सिंह को पूरी रात हाजत में रखा गया. मामला परिजनों तक पहुंचा और फिर देखते-देखते हाइ वोल्टेज ड्रामे में तब्दील हो गया. लोगों का आना-जाना भी जारी हो गया. मामला पुलिस कर्मियों के गले की फांस बन गया. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को जानकारी दी गयी. एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ पीएन साहू और उत्पाद विभाग के अधीक्षक सुनील कुमार शुक्रवार की सुबह मुफस्सिल थाना पहुंचे और ब्रेथ एनालाइजर मशीन से भगत सिंह की पुन: जांच की, तो शराब की पुष्टि नहीं हुई.
मुफस्सिल थानाध्यक्ष राजेश व मुंशी अजय हुए निलंबित
एसपी डाॅ सत्यप्रकाश ने इस मामले को लेकर मुफस्सिल थानाध्यक्ष राजेश कुमार और मुंशी अजय कुमार को निलंबित कर दिया है़ एसपी ने बताया कि जांच के दौरान प्रथमदृष्टया गलती होने का मामला पाया गया़ इसको लेकर थानाध्यक्ष व मुंशी को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की जा रही है़ एसडीपीओ पीएन साहू को जांच की जिम्मेदारी दी गयी है. डॉक्टर ने पहले शराब पीने की पुष्टि की थी. बाद में शराब नहीं पीने की बात सामने आयी. एसडीपीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
मुफस्सिल के सभी अफसर हों निलंबित : पूर्व मंत्री
व्यवसायियों से रुपये लेने के मामले में भाजपा नेता व पूर्व सहकारिता मंत्री रामाधार सिंह ने पुलिस अधीक्षक से मुफस्सिल थाना के एक-एक पदाधिकारी को निलंबित करने की मांग की है. मीडिया से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि तीनों व्यवसायियों को पटना बुलाया जायेगा और फिर पुलिस विभाग के डीजीपी के साथ-साथ डीआइजी नैयर हसनैन खां से मामले की शिकायत की जायेगी.
सुजीत मुखिया प्रकरण की हुई पुनरावृति
कुछ माह पहले अंबा थाना क्षेत्र में इसी से मिलता-जुलता मामला सामने आया था. मुखिया संघ के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह को शराब पीने के आरोप में अंबा के थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने गिरफ्तार किया था. मुखिया की दो जगह पर मेडिकल करायी गयी थी. दोनों जगह-जगह डॉक्टर की रिपोर्ट अलग मिली थी. इस मामले में एसपी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार को निलंबित कर दिया था.
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष की रही अहम भूमिका
व्यवसायी से पैसा लेने के बाद जिस तरह से मामला ड्रामे के रूप में तब्दील हुआ और फिर पुलिस पदाधिकारियों की निलंबन तक पहुंचा़, इसमें भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने अहम भूमिका निभायी. पुरुषोत्तम ने मामले की जानकारी पाते ही प्रशासनिक पदाधिकारियों को इससे अवगत कराया और सच्चाई को सामने लाने में सहयोग भी किया. इसका नतीजा रहा कि दो पुलिसवाले तत्काल निलंबित हो गये.

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