इस अस्पताल में झाड़-फूंक कराने आते हैं मरीज!

सुजीत कुमार सिंह औरंगाबाद : इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि समाज में आज भी अंधविश्वास व्याप्त है. ढोंग, पाखंड व अंधविश्वास की बेड़ियों में समाज बुरी तरह जकड़ा हुआ है. आमतौर पर जाहिल इनका शिकार होते हैं, लेकिन गुरुवार को पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वास के तमाशे में शामिल होते दिखे.गुरुवार को […]

सुजीत कुमार सिंह
औरंगाबाद : इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि समाज में आज भी अंधविश्वास व्याप्त है. ढोंग, पाखंड व अंधविश्वास की बेड़ियों में समाज बुरी तरह जकड़ा हुआ है.
आमतौर पर जाहिल इनका शिकार होते हैं, लेकिन गुरुवार को पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वास के तमाशे में शामिल होते दिखे.गुरुवार को सदर अस्पताल में जो कुछ हुआ, वह सचमुच ही चौंकानेवाला था. हुआ यह कि गुरुवार को सदर प्रखंड के बगैया पोखराहां गांव निवासी सुदर्शन राम को गाय का चारा देने के दौरान एक बिच्छू ने काट लिया. बिच्छू के डंक मारने के बाद उठी पीड़ा से वह छटपटाने लगे. इसके बाद परिजन जल्दीबाजी में उन्हें लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. यहां चिकित्सकों ने इलाज करने से पहले सुदर्शन राम की हालत को देखते हुए थोड़ा इंतजार करने को कहा.
लेकिन, परिजन और पीड़ित दोनों घबराये हुए थे. ऐसे में वे सदर अस्पताल के चिकित्सकों पर भरोसा न करके सीधे बिच्छू के विष को झाड़ने का दावा करनेवाले पटनवा, जगदीशपुर निवासी रामएकबाल ठाकुर को सदर अस्पताल में ही बुला लिये. फिर क्या था, सदर अस्पताल में ही खुलेआम अंधविश्वास का खेल शुरू हुआ और सदर अस्पताल कर्मी व तीमारदार सभी इस अंधविश्वास के तमाशबीन बन कर सब कुछ देखते रहे. काफी देर तक यह खेल सदर अस्पताल परिसर में ही चलता रहा और मौके पर मौजूद लोग इस खेल को आंखें फाड़ कर देखते रहे.
अस्पताल पहुंचे कुछ मरीज व तीमारदारों ने कहा कि जब सदर अस्पताल में ही अंधविश्वास का यह खेल अस्पताल प्रशासन के समक्ष हो रहा है, तो इस अस्पताल के चिकित्सकों पर कितना यकीन किया जा सकता है. झाड़-फूंक से ही जब बिच्छू का विष उतर जाये, तो फिर सदर अस्पताल तक मरीजों को आने की क्या आवश्यकता और यहां के दवा, इलाज भी आखिर किस काम के हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस मरीज का अस्पताल में इलाज किया गया है. अस्पताल में झाड़-फूंक कराना का गलत है.लोगों को ऐसे अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए. अस्पताल में सांप व बिच्छू के काटने पर इलाज के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं. ऐसे मामलों में सही दवा से सही इलाज ही एकमात्र समाधान है.
डॉ राज कुमार प्रसाद, उपाधीक्षक

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