अस्पताल में बढ़े टायफाइड व मलेरिया जैसी बीमारियों के मरीज
आसपास की सफाई पर भी रखें ध्यान
दाउदनगर अनुमंडल : बरसात के मौसम में कई प्रकार की मौसमी बीमारियां लोगों हो रही हैं, जो जल प्रदूषण या फूड प्रदूषण के कारण उत्पन्न हो रही हैं. प्रायः प्रतिदिन चिकित्सकों के पास वायरल फीवर से ग्रसित मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी जांच करा कर उनका इलाज किया जा रहा है. बरसात में डायरिया, टायफाइड, जौंडिस जैसी बीमारियों के होने की अधिक संभावना रहती है.
इसके कारण सतर्कता बरतना जरूरी है. एक आकलन व चिकित्सकों के अनुसार, अधिकांशतः वायरल फीवर के मरीजों को जांच में टायफाइड निकल रहा है, जो जल की अशुद्धि के कारण होता है. इसलिए यह जरूरी है कि बरसात में सतर्कता बरती जाये.
अस्पताल में टायफाइड की जांच संभव नहीं : दाउदनगर पीएचसी में टायफायड जांच की सुविधा नहीं है. इसकी जांच निजी जांचघरों में ही हो पाती हैं, तब जाकर टायफाइड का पता चल पाता है. मरीजों को निजी जांचघरों में वहां की निर्धारित शुल्क पर इसकी जांच करानी पड़ती है. हालांकि, पीएचसी में मलेरिया जांच की सुविधा उपलब्ध है.
पीएचसी गेट पर ही जलजमाव व गंदगी का नजारा
एक तरफ जहां चिकित्सकों द्वारा बीमारियों से बचाव के लिए गंदगी से दूर रहने और स्वच्छता का ख्याल रखने की सलाह दी जाती है, तो दूसरी तरफ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेन गेट पर ही व्याप्त गंदगी व जलजमाव ऐसी सलाह को मजाक बना कर रख देती है.
दाउदनगर-बारुण रोड से पीएचसी के मेन गेट तक आम दिनों में भी सड़क कीचड़युक्त बनी रहती है और जलजमाव व्याप्त रहता है. बरसात में यह समस्या बढ़ जाती है. इस समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है. पीएचसी प्रभारी डाॅ मनोज कुमार कौशिक का कहना है कि पीएचसी के अंदर साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था है. मेन गेट पर व्याप्त जलजमाव की समस्या से पूर्व में तीन बार दाउदनगर नप को अवगत कराया गया है. आज तक समस्या समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं दिखी. अब पुनः नप को पत्र लिख कर इस समस्या से अवगत कराया जा रहा है.
