छेड़खानी का विरोध करने पर एसिड फेंक रफीगंज की सलमा की जान लेनेवाले के खिलाफ आया िनर्णय
25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा
24 जून 2016 को हुई थी घटना
औरंगाबाद कार्यालय : राज्य के चर्चित सलमा तेजाब कांड में ठीक एक वर्ष पांच दिन बाद मुख्य आरोपित को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनायी है. गुरुवार को व्यवहार न्यायालय के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश प्रथम अनिल कुमार झा की अदालत ने सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपित मो अजहर को धारा 302 में उम्रकैद की सजा सुनायी है. साथ ही, 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है.
इस कांड में अभियोजन पक्ष से एपीपी शिवलाल महतो, अधिवक्ता मेराज खान ने न्यायाधीश से फांसी की सजा सुनाने की गुहार लगायी, जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने मुख्य आरोपित मो अजहर को इस कांड से बरी करने की मांग की. कोर्ट का फैसला आने के बाद सलमा के अधिवक्ता मेरान खान ने कहा कि मुख्य आरोपित को फांसी की सजा के लिए उच्च न्यायालय जायेंगे.
अजहर के करीबियों को पहले ही हो चुकी है सजा : घटना के तुरंत बाद ही महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, जिसमें मो अजहर सहित उसकी मां बीबी खातून, फुआ जैनुन खातून, चचेरे चाचा मो जमाल व मो कमाल को नामजद आरोपित बनाया गया था. 23 जून को न्यायाधीश ने मुख्य आरापित मो अजहर को इस कांड में मुख्य रूप से दोषी पाया था और सजा के बिंदु पर 29 जून की तिथि निर्धारित की गयी थी. अजहर को छोड़ कर अन्य चार आरोपितों को एक-एक वर्ष की सजा सुना कर न्यायालय से जमानत पर छोड़ दिया गया था.
फैसले पर टिकी थीं सबकी निगाहें : चर्चित सलमा एसिड कांड में गुरुवार को होनेवाले फैसले पर हजारों लोगों की निगाह टिकी थी. चर्चाओं का बाजार सुबह से ही गर्म था. रफीगंज से लेकर औरंगाबाद तक इंतजार और सिर्फ इंतजार का माहौल था. वैसे पूरे जिले के लिए यह चर्चित मामलों में एक था. न्यायालय में दोपहर से ही लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी थी. शाम चार बजे फैसला आनेवाला था. जैसे ही मुख्य आरोपित मो अजहर चेहरे पर रूमाल बांधे न्यायालय में पहुंचा, वैसे ही लोगों की निगाह उस पर टिक गयी, फिर तो जितनी मुंह उतनी बातें.
उच्च न्यायालय से लगायेंगे गुहार : सलमा तेजाब कांड में बचाव पक्ष से बहस करनेवाले अधिवक्ता प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि वे न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं है. इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे और जो मामले में त्रुटि दिखी है, वह वही दूर होगी. वैसे बचाव पक्ष न्यायालय के फैसले का सम्मान करता है.
15 सितंबर को हुई थी सलमा की मौत
गौरतलब हो कि 24 जून 2016 को रफीगंज बाजार के तकिया पर राजा बाजार में कौसर कादरी की 14 वर्षीय पुत्री सलमा खातून द्वारा छेड़खानी का विरोध किये जाने पर मुहल्ले के ही मो अजहर ने एसिड अटैक किया था. एसिड अटैक में सलमा गंभीर रूप से झुलस गयी थी.
घटना के तुरंत बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रफीगंज में पीड़िता का इलाज कराया गया था, लेकिन उसकी स्थिति को नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने मगध मेडिकल कॉलेज, गया रेफर कर दिया था. मेडिकल कॉलेज में भी जब सलमा की हालत नहीं सुधरी, तब जिला प्रशासन और रफीगंज विधायक अशोक सिंह की पत्नी व समाजसेविका निशा सिंह ने अपनी रुचि दिखायी और पीड़िता को नयी दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भरती कराया. लेकिन तीन ऑपरेशन होने के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका. इलाज के क्रम में ही 15 सितंबर 2016 को सलमा की मौत हो गयी.
सलमा के परिवार को मिली धमकी
न्यायालय में फैसला मुकर्रर होने के बाद जैसे ही आरोपित मो अजहर पुलिस हिरासत में बाहर निकला, सलमा के परिवार को देख कर आग बबूला हो उठा और गाली-गलौज शुरू कर दिया. इधर, सलमा के भाई मंजर अमन ने बताया कि न्यायालय से बाहर निकलते ही अजहर के परिजनों ने देख लेने की धमकी दी है.
घटना के दो माह के अंदर पुलिस ने दायर की थी चार्जशीट
सलमा पर हुए एसिड अटैक के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुसंधान की कार्रवाई पूरी की और दो माह के अंदर साक्ष्य के साथ न्यायालय में चार्जशीट समर्पित करते हुए मामले को ट्रायल में भेजा. इस दौरान पुलिस अधीक्षक डाॅ सत्यप्रकाश ने दिल्ली के एम्स में पोस्टमार्टम करनेवाले चिकित्सक डाॅ श्याम किशोर सहित नौ लोगों की गवाही करायी. इसी का परिणाम हुआ कि एक वर्ष में इस कांड में शामिल आरोपितों को न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गयी.
उम्रकैद की सजा से मायूसी हाथ लगी
सलमा तेजाब कांड में मुख्य आरोपित मो अजहर को उम्रकैद की सजा सुनाये जाने के बाद सलमा के पिता मो कौशर कादरी, भाई मंजर अमन व अन्य परिजनों ने मीडिया से कहा कि उन्हें मायूसी हाथ लगी है. हमें फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं था, लेकिन हम लोग न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं.
जिन लोगों की हुई थी गवाही
सलमा की मां मदीना खातून, पिता मो कौशर कादरी, बहन जेबा परवीन, रौशनी परवीन, जासमिन परवीन, महिला थानाध्यक्ष शकुंतला कुमारी, रफीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डाॅ अजीत सिंह, रफीगंज के दारोगा रामस्वरूप राम व एम्स के डाॅ श्याम किशोर की गवाही हुई थी.
