सुजीत कुमार सिंह
औरंगाबाद : सदर अस्पताल का नाम सुनते ही आमलोगों के जेहन में कुव्यवस्था की एक तसवीर उभर पड़ती है. आम लोगों का अनुभव ऐसा ही है. हाल के दिनों में अस्पताल अपनी कुव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में रहा है.
अब अस्पताल की स्थिति सुधारने के लिए प्रबंधन ने एक जम्बोजेट कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की है. वर्तमान में 112 बेड का यह अस्पताल कुछ ही महीनों बाद 300 बेड के अस्पताल में तब्दील हो सकता है, जहां मरीजों के हर मर्ज का इलाज होगा. राज्य के नौ मॉडल जिला अस्पतालों में औरंगाबाद का सदर अस्पताल भी शामिल है, जिनके विकास की योजना सरकार ने मांगी है.
23 जून यानी आज मॉडल अस्पताल की कार्ययोजना पर राज्य स्वास्थ्य समिति पटना में एक बैठक बुलायी गयी है. इसमें अस्पताल को विकसित किये जाने की योजना पर चर्चा होगी. इस बैठक में औरंगाबाद से डीपीएम कुमार मनोज व प्रबंधक हेमंत राजन शामिल होंगे और सदर अस्पताल के विकास से संबंधित बनायी गयी लगभग आठ करोड़ की कार्ययोजनाओं को रखेंगे. बैठक में मातृ व शिशु कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु भूषण, एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर शशिभूषण, राज्य सलाहकार अजीत कुमार शामिल होंगे.
डॉक्टरों व कर्मियों पर भी दिया गया है ध्यान : सदर अस्पताल में मैन पावर की आवश्यकताओं को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेवारियों पर ध्यान दिया है. कार्ययोजना के अनुसार 47 डॉक्टर, 100 नर्स, आठ फार्मास्सिट, 10 ड्रेसर, चार ओटी अस्सिटेंट, तीन रेडियोग्राफर सहित 179 कर्मियों की मांग रखी गयी है. अभी वर्तमान में महज 30 कर्मी ही सेवा में लगे हैं. ऐसे में योजना को मंजूरी मिली, तो मरीजों को काफी लाभ होगा.
डीपीएम कुमार मनोज की मानें, तो ओपीडी में बढ़ती भीड़ को देखते हुए डायग्नोस्टिक भवन का भी री-मॉडलिंग किया जायेगा. तीन फ्लोरवाले इस भवन में मलेरिया विभाग को तोड़ कर बनाये जानेवाले नये भवन को जोड़ा जायेगा. पहले तल्ले पर ओपीडी), रजिस्ट्रेशन व दवा वितरण काउंटर के साथ-साथ लगभग 400 मरीजों को बैठने की व्यवस्था होगी. इसी भवन में दूसरे तल्ले पर अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और सीटी स्कैन की व्यवस्था होगी.
मौजूदा रजिस्ट्रेशन काउंटर को रोगी सहायता केंद्र के रूप में विकास किया जायेगा. कैदी वार्ड व आइसोलेशन वार्ड को तोड़ कर दो फ्लोर का भवन बनाया जायेगा. इसमें अलग-अलग बीमारियों के मरीजों को अलग-अलग तौर पर रखा जायेगा. पुराने आइसीयू भवन में बच्चा वार्ड का निर्माण होगा. मॉडल ओटी बनाया जायेगा. इमरजेंसी भवन का विस्तार होगा. यहां आइओटी व प्रयोगशाला कक्ष बनाया जायेगा.
कार्ययोजना प्रस्तुत कर दिये जाने के बाद अब सब कुछ सरकार के हाथ में है. सरकार कार्ययोजना को मंजूरी दे देती है, तो औरंगाबाद व आसपास के जिलों को फायदा होगा. सरकार व अधिकारियों का मौजूदा रवैया इस बारे में बहुत ज्यादा आश्वस्त करनेवाला नहीं है.
अब भी यह अस्पताल 112 बेड का है. लेकिन, इसके अनुरूप मानव संसाधन (एचआर) यानी, चिकित्सक व अन्य कर्मी यहां उपलब्ध नहीं हो सके. इसके कारण अस्पताल में अक्सर इलाज को लेकर हंगामे की स्थिति बनती है और मामूली परेशानीवाले मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है. हाल में अस्पताल में आइसीयू का निर्माण भी हुआ है. लेकिन, केवल चिकित्सक व कर्मचारियों के अभाव में यह आज तक चालू नहीं हो सका. ऐसे में अगर प्रयास केवल भवन बनाने तक सिमट जाता है, तो यह जिलेवासियों का दुर्भाग्य ही होगा, साथ ही सरकारी धन की बरबादी भी.
