औरंगाबाद : चंपारण का प्रयोग असाधारण प्रयोग था. यह सिर्फ किसानों का नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों का आंदोलन था. चंपारण आंदोलन चरित्र को गढ़ने का मूल मंत्र था, लेकिन आज हम इसे भुलाने लगे हैं.
ये विचार वरिष्ठ पत्रकार सह जदयू राज्यसभा सांसद हरिवंश ने बुधवार को यहां नगर भवन में लोक समिति द्वारा आयोजित ‘चंपारण सत्याग्रह में अनुग्रह बाबू की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा में लोगों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये. हरिवंश ने कहा कि महात्मा गांधी इस सत्याग्रह से सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं चाह रहे थे, बल्कि उनका यह देश के लिए चरित्र निर्माण का एक प्रयोग था. अपने विचारों और अनुशासन की लड़ाई के बल पर राजनीतिक चरित्र का निर्माण महात्मा गांधी ने किया है.
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कभी भी भारत की आजादी का सपना नहीं देखा, बल्कि अपने प्रयोग व सत्याग्रह से अंगरेजों के प्रभाव व विचारों से समाज को मुक्त कराने का कार्य किया. इन्हीं बातों से डॉ अनुग्रह बाबू (डॉ अनुग्रह नारायण सिंह) गांधी से प्रेरित थे और यही वजह है कि उनके चंपारण सत्याग्रह के मजबूत साथी के रूप में अनुग्रह बाबू ने अपनी भूमिका निभायी.
