Arwal News (निशिकांत) : अरवल सदर अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा नहीं है. इसके कारण यहां कार्यरत डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को किराये के मकान में रहना पड़ता है. कुछ कर्मी व डॉक्टर दूसरे शहर से आते-जाते हैं, जिससे अस्पताल का ओपीडी प्रभावित होता है. जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल बनने के बाद परिसर के पास डॉक्टरों के लिए आवासीय फ्लैट बनाये गये थे. इनमें मात्र एक चिकित्सक को ही फ्लैट आवंटित किया गया, जबकि बाकी फ्लैट दूसरे विभागों के अधिकारियों को दे दिये गये.
स्थायी आवास नहीं होने से कई चिकित्सक दूसरे शहरों से आना-जाना करने को मजबूर
वहीं, हाल ही में सदर अस्पताल के सामने कर्मचारियों के लिए बने आवासीय फ्लैट स्वास्थ्य कर्मियों को आवंटित किये गये हैं. इनमें जीएनएम और एएनएम कर्मियों को रहने की सुविधा दी गयी है. जिले के सदर अस्पताल में कुल 22 चिकित्सक और 28 कर्मचारी कार्यरत हैं. सिविल सर्जन अरवल पीएचसी भवन में रहते हैं, जबकि अस्पताल उपाधीक्षक किराये के मकान में रह रहे हैं. कई चिकित्सक पटना, औरंगाबाद, दाउदनगर और पालीगंज से प्रतिदिन आना-जाना करते हैं. अरवल के सिविल सर्जन के लिए भी स्थायी आवास उपलब्ध नहीं है. वे वासिलपुर पीएचसी के जर्जर भवन में रह रहे हैं. वहीं सदर अस्पताल के सामने सिविल सर्जन के लिए बन रहा भवन अधूरा पड़ा है. बताया जाता है कि निर्माण कार्य बीच में छोड़कर ठेकेदार फरार हो गया.
आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में होती है परेशानी
चिकित्सकों के मुख्यालय में नहीं रहने के कारण अस्पताल व्यवस्था पर असर पड़ रहा है. बाहर से आने के कारण ओपीडी हर दिन सुबह 10 बजे के बाद शुरू हो पाता है. वहीं कर्मचारियों को भी काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. निजी मकानों में रहने या दूसरे शहरों से आने-जाने के कारण आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देर हो जाती है. एनएच पर जाम लगने की स्थिति में डॉक्टरों और कर्मियों को और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस संबंध में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ उमेश प्रसाद ने बताया कि कैंपस में आवास नहीं रहने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कत होती है.
