जहानाबाद(सदर) : शहर में नदियों के संरक्षण को लेकर प्रशासन लापरवाह बना हुआ है. यहां रोज नदी के दोनों किनारे पर अवैध कब्जे का खुला खेल चल रहा है. यहां बहने वाली दरधा-यमुने नदी की ताजा सूरत-ए-हाल ऐसी है कि लगातार सिमटती चौड़ाई के चलते यह कैनाल या एक बड़े नाले की तरह दिखती है. […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
जहानाबाद(सदर) : शहर में नदियों के संरक्षण को लेकर प्रशासन लापरवाह बना हुआ है. यहां रोज नदी के दोनों किनारे पर अवैध कब्जे का खुला खेल चल रहा है. यहां बहने वाली दरधा-यमुने नदी की ताजा सूरत-ए-हाल ऐसी है कि लगातार सिमटती चौड़ाई के चलते यह कैनाल या एक बड़े नाले की तरह दिखती है.
झलास-मेघरिया से लेकर जाफरगंज-एरोड्रम तक नदी के तट पर बड़े-बड़े मकान बेरोकटोक बनाये जा रहे हैं. खासकर श्मशान से पूर्व संगम से वीटी स्कूल के इलाके में कई जगहों पर बीते कुछ दिन तक जो कच्ची संरचनाएं बनी थीं,उन्हें भी बेरोकटोक पक्का निर्माण का शक्ल दिया जा रहा है.
नदियों के प्रदूषण की बात करें तो इसमें बड़े पैमाने पर गिरने वाली नालियों के कारण इसका पानी दुर्गंधमय और किनारे कचरे से पटे हैं. अंचल कर्मचारी सुखदेव प्रसाद ने नदियों के अतिक्रमण के बाबत सीओ को एक रिपोर्ट सौंपी थी. जिसमें नदियों को संरक्षित करने के लिए अविलंब मापी कराने की ताकीद की गयी थी.
रिपोर्ट में नदी की जमीन पर पक्का निर्माण, झोपडि़यां, खेती करने और कब्जाने की नीयत से घेराबंदी करने का जिक्र किया गया है. बभना, मेघरिया, श्मशान घाट और होरिलगंज में नदी की भूमि पर कतिपय लोगों द्वारा खेती भी की जा रही है. कर्मचारी ने बताया कि मापी लंबित रहने की स्थिति में अतिक्रमणकारी स्थायी रूप से नदी को अपनी जमीन बताने लगे हैं.
नदी के भौतिक सत्यापन के दौरान दरधा नदी पुल से पूर्व की ओर बने मकानों के मालिकों द्वारा नदी किनारे तक घर बनाने की बात सामने आई है. बभना कटैया मौजा के खाता संख्या 101, प्लॉट संख्या 397 में 2200 एकड़ भूमि नदी के लिए चिन्हित है.
जबकि जहानाबाद मौजा के खाता संख्या 183, प्लॉट संख्या 1436 में 27 एकड़ भूमि नदी के नाम पर दर्शायी गयी है.