Arrah News (नरेंद्र प्रसाद सिंह) : भोजपुर जिले के सोन नद से लगातार दूसरे जिलों और राज्यों में लाल बालू भेजा जा रहा है, जिससे आरा सहित पूरे इलाके में विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है. बेतहाशा खनन और ट्रकों के अनियंत्रित परिचालन से स्थानीय लोग रोजाना भीषण जाम, मानसिक उत्पीड़न और पर्यावरणीय प्रदूषण झेलने को मजबूर हैं. जिला प्रशासन की शिथिलता के खिलाफ अब जिलेवासियों में आक्रोश पनप रहा है और लोग बाहरी क्षेत्रों में बालू भेजने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग करने लगे हैं.
जाम से एम्बुलेंस और स्कूली बच्चे हो रहे परेशान
लाल बालू के इस खेल में ट्रकों की लंबी कतारें जिले के हर कोने में दिखाई देती हैं. इसके चलते बिहटा-बिहिया स्टेट हाईवे और बिहटा-सहार-संदेश-सकड्डी स्टेट हाईवे सहित शाहपुर और कोइलावर की प्रमुख सड़कें रोजाना जाम की चपेट में रह रही हैं. इस समस्या से आम लोग कराह रहे हैं, सड़कें टूट रही हैं और कई बार जाम में एम्बुलेंस फंसने से मरीजों की जान पर बन आती है. दफ्तर और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भी रोजाना घंटों समय की बर्बादी झेलनी पड़ रही है.
एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां
सोन नद में नियमों को ताक पर रखकर बेतहाशा बालू खनन किया जा रहा है. राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (NGT) के गाइडलाइंस का पालन नहीं होने से आरा का वायुमंडल बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जिले में प्रदूषण का स्तर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शुमार हो गया है. बड़े पैमाने पर हो रहे खनन से भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में आम लोगों के सामने भारी जल संकट खड़ा हो सकता है और खेतों की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है.
धंधेबाजों के ऊंचे हौसले, तटों पर लगे बालू के ऊंचे पहाड़
स्थानीय निवासी सोनू कुमार और अखिलेश कुमार का कहना है कि बालू के धंधेबाज अपने मुनाफे के लिए दूसरे राज्यों में बालू भेजकर जिले को बर्बाद कर रहे हैं. प्रशासन के ढीले नियमों के कारण सोन नद के तटवर्ती क्षेत्रों में पहाड़ों की ऊंचाई तक बालू जमा कर दिया गया है, जिससे हमेशा बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है. सरकार राजस्व के लिए घाटों की नीलामी करती है, लेकिन इसकी आड़ में कई अवैध घाट भी धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती.
क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी
इस पूरे मामले पर भोजपुर के जिला खनन पदाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि सभी बालू घाटों की नियमित निगरानी की जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार ही खनन करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे जिले या राज्यों में बालू ले जाने पर रोक लगाने के लिए फिलहाल कोई सरकारी गाइडलाइन नहीं है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर उठ रही मांगों और इस विकट समस्या पर आगे उच्च स्तर पर चर्चा की जाएगी और उसके अनुसार ही आगे की कार्रवाई होगी.
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