फारबिसगंज में श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 139वां जन्मदिवस: तड़के 5:27 बजे उषा प्रार्थना, मातृसम्मेलन में संस्कारों पर चर्चा

फारबिसगंज के सत्संग केंद्र में ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 139वां जन्मदिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर सामूहिक प्रार्थना, नाम संकीर्तन और मातृसम्मेलन का आयोजन किया गया. देर शाम महाप्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ.

अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित परमप्रेममय श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचंद्र जी के सत्संग केंद्र में बुधवार को उनका 139वां जन्मदिवस अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया.

इस पावन अवसर पर आयोजित जन्मोत्सव समारोह में फारबिसगंज शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों सत्संगी भाई-बहनों ने हिस्सा लेकर गुरु चरणों में अपनी आस्था प्रकट की.

प्रात:कालीन सामूहिक प्रार्थना और नाम संकीर्तन से गूंजा परिसर

उत्सव की औपचारिक शुरुआत तड़के 5:27 बजे सामूहिक उषा प्रार्थना के साथ हुई. इसके उपरांत विभिन्न पवित्र धर्मग्रंथों का पाठ, सत्संग और नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया.

संकीर्तन सत्र में भजन गायक भानु सिंह, हीरा दा, आयुष झा, बिमल दे और बिजय भगत ने एक से बढ़कर एक भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए. विशेष रूप से भानु दा द्वारा गाए गए कीर्तन 'आया आया रे सतदर्श मस्त भुवन में, धूप जलाओ दीप जलाओ...' पर पूरा परिसर झूम उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया.

'जो आचरण से सत्पथ दिखाए, वही सद्गुरु': ऋत्विक समीर दा

सत्संग सत्र के दौरान स्थानीय ऋत्विक समीर दा ने श्रीश्रीठाकुर जी के दिव्य जीवन चरित्र और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा कि ठाकुरजी कलयुग में भटके हुए मानव समाज के दुखों को दूर करने और प्रेम व सद्भाव का संदेश देने के लिए अवतरित हुए हैं. सच्चा सद्गुरु वही है जो केवल उपदेश न देकर अपने आचरण से सत्य का मार्ग दिखाए. उन्होंने सभी भक्तों से गुरु की वाणी को अपने दैनिक जीवन और कर्मों में उतारने का आह्वान किया.

मातृसम्मेलन में नारी सशक्तीकरण और संस्कार पर विमर्श

अपराह्न 4:30 बजे सत्संग परिसर में विशेष मातृसम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सत्र में समाज निर्माण और परिवार में संस्कारों की स्थापना के लिए माताओं की भूमिका पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ.

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि एक जागरूक और संस्कारी माता ही आदर्श मनुष्य और सुदृढ़ समाज का निर्माण कर सकती है. इस दौरान पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों और आकर्षक आलोक मालाओं से सजाया गया था, जिससे उत्सव का स्वरूप अत्यंत मनोहारी लग रहा था.

महाप्रसाद वितरण और भंडारे के साथ समापन

धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के पश्चात देर शाम एक भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को खिचड़ी, चटनी और खीर का महाप्रसाद प्रेमपूर्वक वितरित किया गया.

कार्यक्रम को सफल बनाने में समीर कुमार दे, विजयकांत झा, ब्रजेन्द्र नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में सत्संग समिति के सेवादार, मातृशक्ति और स्थानीय श्रद्धालु सक्रिय रहे.

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लेखक के बारे में

By विपुल विश्वास

विपुल विश्वास प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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