अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत झिरुआ पछियारी पंचायत के पंचायत समिति सदस्य (पंसस) प्रमोद मेहता उर्फ पप्पू मेहता के पिता और आर्य समाज के वरिष्ठ प्रचारक बिंदेश्वरी मेहता का मंगलवार को निधन हो गया. वे विगत काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे.
लंबे समय तक अस्वस्थ रहने के बावजूद वे अंतिम समय तक सामाजिक समरसता और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे. उनके निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. परिजनों के अनुसार वे अपने पीछे दो पुत्र, एक पुत्री और नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
वैदिक संस्कृति व आर्य समाज के मजबूत स्तंभ थे बिंदेश्वरी मेहता
क्षेत्र में बिंदेश्वरी मेहता की पहचान केवल एक जागरूक अभिभावक तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्र में वैदिक विचारों और आर्य समाज के सिद्धांतों को घर-घर पहुंचाने वाले सक्रिय प्रचारक के रूप में जाने जाते थे:
- सामाजिक योगदान: गांव में पंचायती, आपसी विवादों के निपटारे, गरीब कन्याओं के विवाह और धार्मिक आयोजनों में वे सदैव अग्रणी पंक्ति में खड़े रहते थे.
- आर्य समाज का प्रचार-प्रसार: इलाके में वैदिक यज्ञ, संस्कारों और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन को लेकर उन्होंने दशकों तक निरंतर अलख जगाई.
शोक संतप्त परिवार एवं जीवन सारांश
| विवरण घटक | तथ्य / विवरण |
| दिवंगत व्यक्तित्व | बिंदेश्वरी मेहता (वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं आर्य समाज प्रचारक) |
| पारिवारिक पृष्ठभूमि | पंचायत समिति सदस्य प्रमोद मेहता उर्फ पप्पू मेहता के पिता |
| परिवार के सदस्य | दो पुत्र, एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार |
| निधन का कारण | लंबे समय से चल रही गंभीर बीमारी |
| निवास स्थल | ग्राम व पंचायत- झिरुआ पछियारी, प्रखंड- फारबिसगंज (अररिया) |
आवास पर उमड़ा जनसैलाब, राजनीतिक व सामाजिक दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
निधन का समाचार मिलते ही झिरुआ पछियारी स्थित उनके पैतृक आवास पर सांत्वना देने और अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न दलों के नेताओं का तांता लग गया.
शोक जताने वालों में प्रमुख रूप से:
- विधायक मनोज विश्वास
- पूर्व विधायक लक्ष्मीनारायण मेहता
- प्रखंड प्रमुख ओम प्रकाश पासवान
- भाजपा नेता दिलीप मेहता
- प्रदीप मेहता
- विभाष चंद्र मेहता
नेताओं ने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बिंदेश्वरी मेहता का जाना न केवल पीड़ित परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज और आर्य समाज आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है.
