फारबिसगंज. शहर के आरबी लेन में स्थित तेरापंथ भवन में रविवार को मुनिश्री प्रशांत कुमार जी व कुमुद कुमार जी का भव्य स्वागत जैन तेरापंथ समाज ने किया. जैन तेरापंथ धर्म संघ में साधु सतियों का सावन से लेकर कार्तिक मास तक चार महीने का चातुर्मास काल रहता है. इन चार महीनों के पश्चात गुरु इंगित आगामी चातुर्मास को नजर में रखते हुए साधु साध्वियां आसपास के क्षेत्र में विचरण करते है. इसी क्रम में आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान व ज्ञानी संत मुनि श्री प्रशांत कुमार व कुमुद कुमार जी का पिछले चातुर्मास क्षेत्र सिलचर से आज 49वां पड़ाव फारबिसगंज में हुआ. मुनि द्वय भारत के कई क्षेत्रों की यात्रा करते हुए पिछले चातुर्मास स्थल सिलचर से असम,बंगाल बिहार, नेपाल व सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा करते हुए फारबिसगंज में अल्पकालीन प्रवास के लिए तेरापंथ भवन आये. पिछले दो दिनों से फारबिसगंज सभा तेरापंथ युवक परिषद व महिला मंडल मुनि द्वय की रास्ते की सेवा में लगी हुई थी. बीते दिन का प्रवास बथनाहा में प्रयाग बाबू के घर पर रहा जहां पर स्थानीय क्षेत्र के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी धर्मानुरागी भाई बहनों का तांता दिन भर लगा रहा. बथनाहा से विहार करके मुनि श्री प्रातःकाल वयोवृद्ध श्रावक सूरजमल घोषल के यहां पर आए व वहां से जुलूस बद्ध होकर सभी श्रावक श्राविकाओं के साथ तेरापंथ भवन में प्रवेश किया. तत्पश्चात मुनि श्री के स्वागत का कार्यक्रम रखा गया.कार्यक्रम की शुरुआत में सभाध्यक्ष महेंद्र बैद ने मुनिश्री का स्वागत करते हुए लाडनूं में सभा द्वारा संचालित अपना चौका के लिए आभार प्रकट किया. कहा कि इस अल्पकालीन प्रवास में इसी तरह की प्रेरणाएं फारबिसगंज वासियों को देकर उन्हें आत्म कल्याण की ओर राह दिखाएं. तत्पश्चात महिला मंडल की अध्यक्ष समता दुगड़ ने महिला मंडल की तरफ से मुनिश्री का स्वाग व अभिनंदन किया .महिला मंडल की बहनों ने स्वागत गीतिका गाकर अपनी भावों को मुनि श्री के सामने प्रस्तुत किया. तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष आशीष गोलछा ने युवक परिषद की तरफ से मुनि श्री का स्वागत किया. सभा के मंत्री मनोज भंसाली ने दोनों संतों का जीवन परिचय दिया. बिहार आंचलिक प्रभारी नवरत्न दुगड़ ने अपने भावों को मुनिश्री के समक्ष रखा. ज्ञानशाला के बच्चों के द्वारा एक सुंदर प्रस्तुति प्रस्तुत की गई. मुनिश्री कुमुद कुमार जी ने अपने वक्तव्य में समय की महत्त्व को बताते हुए कहा कि आज के समय में मनुष्य के पास सब कार्य करने के लिए समय है लेकिन दो घड़ी प्रभु का नाम स्मरण करने के लिए समय नहीं होता है. अगर हम दिन के 24 घंटे में दो-दो मिनट भी निकाल लेते हैं तो एक काल मुहूर्त 48 मिनट का समय,सामयिक के रूप में निकल सकता है. साथ ही साथ सभा के द्वारा संचालित किया जा रहे लाडनूं में अपना चौका के लिए फारबिसगंज क्षेत्र को साधुवाद दिया कि उन्होंने साधु संतों की प्रेरणा को ग्रहण करते हुए तुरंत क्रियान्वित भी किया.
मुनिश्री का फारबिसगंज में किया भव्य स्वागत
समय का सदुपयोग जरूरी : मुनिश्री
