Araria News: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अररिया जिले में देशभक्ति और महिला आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है. जिले की 87 जीविका दीदियों ने केवल 6 दिनों में 36 हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर यह साबित कर दिया कि राष्ट्रसेवा और रोजगार साथ-साथ चल सकते हैं. यह पहल केवल "हर घर तिरंगा" अभियान तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बन गई.
6 दिन में तैयार हुए 36 हजार से अधिक तिरंगे
जिले के सभी 9 प्रखंडों में राष्ट्रीय ध्वज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अररिया सदर प्रखंड स्थित दीप सीएलएफ के तत्वावधान में तिरंगा निर्माण का कार्य शुरू किया गया.
इस अभियान में 87 जीविका दीदियों ने लगातार 6 दिनों तक कटाई, सिलाई और फिनिशिंग का काम किया और 36 हजार से अधिक तिरंगे तैयार किए.
प्रशासन के अनुसार प्रत्येक प्रखंड को लगभग 4,000 तिरंगे उपलब्ध कराए गए हैं.
स्कूल, पंचायत भवन और सरकारी कार्यालयों में होगा उपयोग
तैयार किए गए राष्ट्रीय ध्वजों का वितरण जिले के सभी प्रखंडों में कर दिया गया है.
इन तिरंगों का उपयोग सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, पंचायत भवनों और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया जाएगा.
इससे स्थानीय स्तर पर तिरंगों की उपलब्धता सुनिश्चित हुई और अभियान को गति मिली.
देशभक्ति के साथ बढ़ी महिलाओं की आय
प्रशासन का कहना है कि इस पहल से जीविका दीदियों को उनकी मेहनत के बदले अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है.
स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के प्रयासों को भी बल मिलेगा.
अधिकारियों के अनुसार स्थानीय संसाधनों और महिलाओं के कौशल का उपयोग कर इस तरह की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
"यह केवल काम नहीं, देश सेवा का अवसर था"
तिरंगा निर्माण में जुटी महिलाओं ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व के लिए तिरंगा तैयार करना उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि गर्व और देश सेवा का अवसर भी था.
उन्होंने बताया कि इस काम से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ सिलाई और फिनिशिंग जैसे कौशल को और बेहतर करने का अवसर मिला.
कई महिलाओं ने कहा कि भविष्य में भी यदि इस तरह के स्थानीय उत्पादन कार्य मिलते हैं, तो वे और अधिक संख्या में जुड़ना चाहेंगी.
Araria News: हर घर तिरंगा अभियान को मिली नई ताकत
अररिया की जीविका दीदियों की यह पहल बताती है कि सरकारी अभियान तब और प्रभावी हो जाते हैं जब उनमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी होती है.
6 दिनों में 36 हजार तिरंगे तैयार कर महिलाओं ने न केवल हर घर तिरंगा अभियान को मजबूती दी, बल्कि यह भी दिखाया कि आत्मनिर्भर भारत का सपना गांव की महिलाओं के हाथों से भी आकार ले रहा है.
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