रजत जीतने की खुशी से ज्यादा सोना चूक जाने का गम : श्रेयसी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना: 20वें कॉमनवेल्थ गेम्स में डबल ट्रैप शूटिंग स्पर्धा का रजत पदक जीतनेवालीं श्रेयसी सिंह का सम्मान सोमवार को ‘पहल’ संस्था द्वारा किया गया. श्रेयसी का सम्मान चांदी का मुकुट पहना कर छोटी-सी बच्ची श्रेया ने किया. पहल के संयोजक अखिलेश ने प्रतीक चिह्न् भेंट करते हुए मांग की कि श्रेयसी को राज्य सरकार भी सम्मानित करे व बिहार का ब्रांड एंबेसडर बनाये. श्रेयसी ने कहा, ‘यह पदक मेरे माता-पिता को समर्पित है.

यह मेरे पापा का सपना था, जिसे मैंने पूरा किया. मेरी मां ने पिताजी के जाने का बाद मुङो बल देने का काम किया है.’ हालांकि उन्होंने कहा कि जब उन्होंने रजत जीता, तब उन्हें खुशी से ज्यादा सोना चूक जाने का गम था. इसलिए उनका लक्ष्य सितंबर में स्पेन के ग्रैनाडा में होनेवाली वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप और दक्षिण कोरिया के इंचियोन में होनेवाले एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना है. साथ ही 2016 में होनेवाले ओलिंपिक में भी स्वर्ण जीतना चाहती हैं. खेल के विकास के बारे में पूछे जाने पर श्रेयसी ने कहा कि जमुई के सांसद चिराग पासवान से उनकी बात हुई है और उन्होंने वादा किया है कि गिद्धौर (श्रेयसी का पैत्रिक गांव) में जल्द ही शूटिंग रेंज बनवाये जायेंगे.

श्रेयसी में अजरुन की छवि : राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने शुरुआत गीता के श्लोक से करते हुए श्रेयसी को आशीर्वाद दिया. उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स से कुछ दिन पहले एक अखबार में श्रेयसी की एक आंख बंद कर अभ्यास करते हुए तसवीर देखी थी, तभी अपनी पत्नी से कहा था कि मुङो इस लड़की में अजरुन की छवि नजर आती है. यह पक्का निशाना साध कर देश के लिए पदक लायेगी. उन्होंनेकहा कि बिहार सरकार को गर्व होना चाहिए कि श्रेयसी ने महिला होते हुए भी राज्य को यह सम्मान दिया है, अत: उन्हें तो कम-से-कम एक करोड़ की राशि मिलनी चाहिए. कुणाल ने पूर्व मंत्री और श्रेयसी के पिता के बारे में कहा कि वे दिग्विजय तो थे ही उनकी एक खासियत अजातशत्रु की भी थी. वे आम लोगों के लिए काम करते थे.

सुधार की पहल हो चुकी : विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि विधान परिषद में श्रेयसी को सम्मानित करने का मुद्दा हरेंद्र प्रताप पांडेय ने कुछ दिन पहले उठाया था. साथ ही उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने का मुद्दा भी रणवीर नंदन जी ने उठाया था. सरकार जल्द ही इस पर कदम उठायेगी. मैं खुद इस बात की पहल करूंगा कि श्रेयसी को बिहार का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाये. उन्होंने कहा कि हाल ही में हुआ कबड्डी का सफल आयोजन दर्शाता है कि बिहार में खेल की स्थिति में सुधार हो रहा है.

निखिल ने ली चुटकी : पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने श्रेयसी को आशीर्वाद देते हुए विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि सभापति महोदय अगर कह रहे हैं कि श्रेयसी को सम्मानित करने का मुद्दा उठा है और उसे जल्द ही सम्मानित किया जायेगा, तो यह सराहनीय कदम है और अभी भी देर नहीं हुई है. बिहार की बेटी को उसका हक मिलना ही चाहिए और अगला सम्मान समारोह कृष्ण मेमोरियल हॉल में होना चाहिए. उन्होंने साथ ही कहा कि अब तक कोई भी बिहार का खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया है. ऐसे में श्रेयसी का अंतरराष्ट्रीय पदक न सिर्फ देश के लिए बल्कि राज्य के लिए गर्व की बात है.

शूटिंग नहीं आसान : हाइकोर्ट के जज एके त्रिपाठी ने कहा, ‘शूटिंग बेहद मुश्किल गेम है, खास कर ट्रैप इवेंट, जिसमें आपका लक्ष्य हवा में होता है. ऐसे में शारीरिक से ज्यादा मानसिक बल और एकाग्रता की जरूरत होती है. आशा करता हूं कि श्रेयसी स्वर्ण जीत कर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगी.

भावुक हो उठीं मां, आंखों से छलक पड़े आंसू

पूर्व सांसद और श्रेयसी की मां पुतुल कुमारी भावुक हो उठीं. उनकी आंखों से आंसू छलक उठे. उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है. यह पारीवारिक कार्यक्रम है. यहां जुटे सभी लोग हमारे परिवार से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि वह बेहद मुश्किल क्षण था, जब दादा (स्वर्गीय दिग्विजय सिंह) की तबीयत जून 2010 में बेहद खराब थी और उसी समय श्रेयसी को ट्रायल के लिए दिल्ली जाना था. हमने उसे कहा कि तुम दादा का सपना पूरा करने के लिए जाओ और वह ट्रॉयल में तो सफल हो गयी, पर यह खुशखबरी सुनने के लिए उसके पापा मौजूद नहीं थे.

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