पटना : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए राजभवन से आये परिनियम पर शिक्षा विभाग को आपत्ति है. राजभवन ने परिनियम में कई ऐसे संशोधन पर सहमति जतायी है, जो विश्वविद्यालय के एक्ट में ही नहीं है.
अब शिक्षा विभाग परिनियम पर सोमवार को समीक्षा करेगा और एक्ट के अनुसार नियमों का पालन कर उसे मंजूरी के लिए फिर से राजभवन भेजेगा. इसके बाद राजभवन से सहमति मिलने पर उसे बिहार लोक सेवा आयोग को भेजा जायेगा. विभागीय सूत्रों की माने तो राजभवन ने परिनियम को देखने के लिए तीन कुलपतियों की कमेटी बनायी थी.
इस कमेटी ने परिनियम में संशोधन के अपने सुझाव भी दिये थे. वीसी की कमेटी ने विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए यूजीसी गाइड लाइन 2009 से पहले पीएचइडी करने वाले अभ्यर्थियों को भी मौका देने की सिफारिश की है. साथ ही इंटरव्यू के लिए विषय वार गठित होने वाली कमेटी में एक्टपर्ट का चयन भी कुलपति खुद करना चाहते हैं.
वे विषय के दस एक्सपर्ट का चयन करेंगे, इसमें से बीपीएससी तीन का चयन करेगी. इसके अलावा कुलपति शिक्षकों को हटाने का अधिकार भी खुद रखना चाहते हैं. राजभवन से आये संशोधित परिनियम में इंटरव्यू के लिए 15 अंक को बढा कर 25 कर दिया गया है, जबकि शैक्षणिक योग्यता के लिए 85 की जगह 75 अंक रखे गये हैं. शिक्षा विभाग इन संशोधनों को फिर से एक्ट के अनुसार संशोधित करने की तैयारी कर रहा है.
विभागीय सूत्र बताते हैं कि जो संशोधन हुआ है, वह एक्ट के खिलाफ है. राजभवन को एक्ट के अनुसार फिर से परिनियम को संशोधित किया जायेगा और मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. राज्यपाल कानून के ऊपर गलत संशोधन को मंजूरी नहीं दे सकते हैं.
