जबरन न हो भूमि अधिग्रहण

पटना: किसी की भूमि का अधिग्रहण जबरदस्ती नहीं किया जाये. विकास नियोजन में स्थानीय समूहों की सहमति होनी चाहिए. खाद्य सुरक्षा कानून को पूरी तरह से लागू किया जाये. इन मुद्दों पर जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया. पटना स्थित माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में आयोजित एक बैठक में समन्वय […]

पटना: किसी की भूमि का अधिग्रहण जबरदस्ती नहीं किया जाये. विकास नियोजन में स्थानीय समूहों की सहमति होनी चाहिए. खाद्य सुरक्षा कानून को पूरी तरह से लागू किया जाये.

इन मुद्दों पर जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया. पटना स्थित माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में आयोजित एक बैठक में समन्वय की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव पारित करने में समाज सेवी मेधा पाटकर,आशीष रंजन, कामायनी स्वामी,अरविंद कुमार और मणिलाल मौजूद थे. प्रस्ताव में कहा गया कि भूमि अधिग्रहण करने से पहले आम जनता की सलाह ली जाये. तभी सही मायने में भूमि अधिग्रहण होगा.

कंपनियों के लाभ के लिए भूमि अधिग्रहण : समाजसेवी मेधा पाटकर ने कहा कि कंपनियों के मुनाफे के लिए जल, जंगल, जमीन और खनिज की लूट सरकार कर रही है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण को नष्ट कर सरकार विकास करना चाह रही है. जंगल को नष्ट किया जा रहा है. बड़ी कंपनियों के हित के लिए भूमि अजर्न और पुनर्वास में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 में प्रावधानों में सरकार फेरबदल करना चाह रही है. इसका हम विरोध करते हैं. मेधा पाटकर ने कहा कि नयी सरकार ने आते ही नर्मदा बांध की ऊंचाई 17 मीटर और बढ़ाने की स्वीकृति दी है, जिससे देश के 2.5 लाख लोगों को विस्थापित करना होगा. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बांध को तभी बढ़ाया जायेगा, जब लोगों को पुनस्र्थापन कर दिया जायेगा. समन्वय आशीष ने बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून के कारण देश में कई आंदोलन हुए. लोगों की जान गयी है.

पारित प्रस्ताव

भूमि के मुद्दे पर सार्वजनिक बहस चलाया जाये.

विकास नियोजन में स्थानीय समूहों की सहमति होनी चाहिए.

नर्मदा बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ा दी गयी है. इससे 2.5 लाख आदिवासी, किसान, मछुआरों व मजदूरों को विस्थापित करने का निर्णय गलत है.

खाद्य सुरक्षा कानून को पूरी तरह से लागू किया जाये. रोजगार गारंटी कानून से छेड़छाड़ नहीं हो.

नदी जोड़ परियोजना को बंद करें.

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