क्रिकेटर बनने का था सपना लेकिन किस्मत ने बदल दिया रास्ता, चोट से जूझते हुए तेजस्विन ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. घुटने की चोट से उबरकर उन्होंने यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की, जो किसी भी भारतीय के लिए इस स्पर्धा में पहला मेडल है. उनकी यह कहानी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है.

Tejaswin Shankar: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर ने भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो इससे पहले कोई भारतीय नहीं कर पाया था. ग्लासगो में उन्होंने पुरुष डेकाथलॉन में 7976 अंक जुटाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए. खास बात यह रही कि सिर्फ दो दिन पहले घुटने की पुरानी चोट (पैटेलर टेंडिनाइटिस) के कारण वह अपने पसंदीदा हाई जंप इवेंट से बाहर हो गए थे. दर्द के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 10 कठिन स्पर्धाओं को पूरा कर इतिहास रच दिया.

मेरे लिए बेहद खास पल

मेडल जीतने के बाद तेजस्विन ने कहा, 'चार साल पहले बर्मिंघम में हाई जंप में ब्रॉन्ज जीता था और अब डेकाथलॉन में पदक जीतना किसी सपने के सच होने जैसा है. लिंडन विक्टर और डेमियन वार्नर जैसे दिग्गजों के साथ पोडियम पर खड़ा होना मेरे लिए बेहद खास पल है.'

क्रिकेटर बनना चाहते थे शंकर

21 दिसंबर 1998 को दिल्ली में जन्मे तेजस्विन का पहला सपना क्रिकेटर बनने का था. वह तेज गेंदबाज बनना चाहते थे. उनके पिता हरीशंकर बीसीसीआई के वकील थे और घर में क्रिकेट का माहौल था. लेकिन कम उम्र में ही पिता का ब्लड कैंसर से निधन हो गया. इस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी. स्कूल के दिनों में सरदार पटेल विद्यालय के शारीरिक शिक्षा शिक्षक सुनील कुमार ने उनके लंबे कद और एथलेटिक क्षमता को पहचाना. उन्होंने तेजस्विन को क्रिकेट छोड़कर हाई जंप अपनाने की सलाह दी.

16 साल की उम्र में बनाया रिकॉर्ड

महज 16 साल की उम्र में उन्होंने 2.18 मीटर की छलांग लगाकर 12 साल पुराना राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसके बाद उन्हें अमेरिका की कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति मिली, जहां उन्होंने 2018 में 2.29 मीटर की छलांग लगाकर भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. वह दो बार NCAA डिवीजन-1 हाई जंप चैंपियन भी बने.

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इस स्पर्धा का पहला मेडल

ग्लासगो 2026 में चुनौती और भी बड़ी थी. घुटने की चोट के कारण हाई जंप से हटना पड़ा, लेकिन उन्होंने डेकाथलॉन में उतरने का फैसला किया. शुरुआत में उन्हें खुद भरोसा नहीं था कि शरीर 10 इवेंट तक साथ देगा. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार भारत को इस स्पर्धा का पहला कॉमनवेल्थ मेडल दिला दिया.

PM मोदी ने X पर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस्विन शंकर की उपलब्धि पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, भारतीय खिलाड़ी लगातार इतिहास रच रहे हैं और देश का गौरव बढ़ा रहे हैं. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर तेजस्विन शंकर को बधाई. उन्होंने 10 स्पर्धाओं में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया. भविष्य के लिए उन्हें मेरी शुभकामनाएं.

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अभिजीत कुमार युवा पत्रकार हैं, जिन्हें खेल और खासकर क्रिकेट की दुनिया को करीब से समझने और उसकी अनकही कहानियों को पाठकों तक पहुंचाने का जुनून है. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में काम किया है.

वर्तमान में वह स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के लेखन, संपादन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी संभालते हैं. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आंकड़ों, रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से जुड़ी कहानियों की दुनिया है. खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर मैदान के पीछे की दिलचस्प घटनाओं तक, वह हर कहानी को सरल, सटीक और रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश करते हैं.

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