हैम्बर्ग : कमर की चोट और करीबी मुकाबले हारने से विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप से पहले गौरव बिधूडी का आत्मविश्वास टूटा हुआ था लेकिन भारत के लिए यहां एकमात्र पदक पक्का करके उसके कैरियर को नयी संजीवनी मिल गयी. जुलाई के अंत तक गौरव भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे लेकिन फिर एशियाई मुक्केबाजी परिसंघ ने उन्हें वाइल्ड कार्ड दिया.
मुकाबले के बाद गौरव ने कहा , ‘ ‘जब मुझे वाइल्ड कार्ड के बारे में पता चला तो मैं हर कोच से पूछता रहा कि क्या यह सही है. मैंने सभी से पूछा और सबने जब कह दिया कि हां ये सच है तो ही मैंने चैन की सांस ली. ‘ ‘ दिल्ली का यह मुक्केबाज भारतीय सर्किट पर चर्चा का विषय था क्योंकि हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल से बाहर होने का उसका रिकार्ड हो गया था. ताशकंद में एशियाई चैंपियनशिप में दो बार वह विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने का मौका चूका.
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उसने कहा , ‘ ‘ मैं हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल में हार गया. यहां भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा तो नकारात्मक सोच मुझ पर हावी होने लगी कि कहीं फिर ऐसा ना हो जाये. लेकिन फिर मुझे लगा कि मैं यह मिथक तोड़ सकता हूं. ‘ ‘ उसने कहा , ‘ ‘ एक खिलाड़ी के लिए दिमाग पर काबू रखना बहुत मुशिकल होता है. मेरे दिमाग में भी हर तरह के विचार आ रहे थे. मुझे दिमाग से कई तरह की आवाजें आ रही थी जो सिर्फ मैं सुन सकता था. ‘ ‘ गौरव अगर कल सेमीफाइनल जीत जाता है तो कांस्य से बेहतर पदक जीतने वाला अकेला भारतीय मुक्केबाज होगा.
